यूपीएससी एनडीए की परीक्षा पास किए उम्मीदवारों को SSB के कठिन इंटरव्यू से गुजरना होता है जिसे क्रैक करना हर किसी के बस की बात नहीं है. जब लोग इस फील्ड में कदम रखते हैं तो उनके दिमाग में बस देश का सबसे गौरवशाली ऑफिसर बनना होता है लेकिन NDA में एंट्री पा लेना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है. असली परीक्षा तो, एकेडमी के अंदर शुरू होती है जब उम्मीदवारों को 3 साल की कड़ी ट्रेनिंग का सामना करना पड़ता है.
लेकिन कई इस परीक्षा में पास हो जाते हैं, तो कई फेल. अब उम्मीदवारों के मन में सवाल उठ रहा है कि अगर कोई कैंडिडेट ट्रेनिंग के दौरान फेल हो जाता है, तो क्या होगा?
फेल उम्मीदवारों के लिए NDA का नियम?
ट्रेनिंग के दौरान जो उम्मीदवार फेल हो जाते हैं तो, क्या उन्हें तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है? इसका जवाब है नहीं. इसके लिए NDA एक नियम को फॉलो करता है जिसे ‘रेलीगेशन रूल’ या ‘टर्म बैक’ होना कहते हैं. ये नियम फेल हुए उम्मीदवारों को दोबारा से मौका देता है.
क्या है इसका पूरा नियम?
बता दें कि NDA की ट्रेनिंग 3 साल की होती है जिसमें 6 टर्म्स होते हैं. हर सेमेस्टर 6 महीने का होता है. रेलीगेशन शब्द का मतलब होता है किसी उम्मीदवार को उसके हाल के बैच से जूनियर बैच में डाल देना. मतलब कि अगर कोई उम्मीदवार तीसरे टर्म की फाइनल परीक्षा या ट्रेनिंग में फेल हो जाता है तो उसे चौथे टर्म में भेजने के बजाय तीसरे टर्म में ही रोक दिया जाता है.
3 कारणों से हो सकते हैं रेलीगेट
बता दें कि उम्मीदवार इन तीन कारणों की वजह से रेलीगेट हो सकते हैं –
1. परीक्षा या ट्रेनिंग में फेल- अगर कोई उम्मीदवार कैडेट परीक्षा में पास नहीं हो पाता है या पासिंग नंबर नहीं ला पाता है या स्विमिंग, ड्रिल और फिजिकल ट्रेनिंग (PT) के अनिवार्य टेस्ट्स को तय समय में क्लियर नहीं कर पाता तो उसे इस नियम के मुताबिक रोक दिया जाता है.
2. मेडिकल- ट्रेनिंग के दौरान अगर किसी उम्मीदवार की तबीयत खराब हो जाती है, तो वे 30 दिन से अधिक समय ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं बन पाते हैं. इसके लिए भी इस नियम का यूज किया जाता है.
3. अनुशासनहीनता- वहीं, अगर कोई उम्मीदवार नियमों का उल्लंघन करता है, चीटिंग करता है या चोरी जैसे कामों में शामिल होता है तो उसे भी इस नियम का फॉलो करना पड़ता है.
3 बार फेल होने के बाद नहीं बन सकता है फौजी
अगर मान लेते है कोई उम्मीदवार बार-बार परीक्षा या ट्रेनिंग में फेल हो रहा है या अपनी कमियों को सुधारने में असमर्थ है, तो क्या उन्हें हमेशा के लिए बाहर कर दिया जाता है. आमतौर पर अगर कोई उम्मीदवार 2 बार या पूरी ट्रेनिंग के दौरान अधिकतम 3 बार बार रेलीगेट हो जाता है तो एकेडमी मान लेती है कि वह फौजी अफसर बनने के योग्य नहीं है.

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