लखनऊ
ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 25 जून से नियमित पठन-पाठन शुरू होगा। नए शैक्षिक सत्र में केवल विद्यालय खोलने की औपचारिकता नहीं, बल्कि हर बच्चे के सीखने के स्तर में सुधार, उसकी व्यक्तिगत जरूरतों की पहचान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने मंगलवार को यूट्यूब संवाद के माध्यम से शिक्षकों, बेसिक शिक्षा अधिकारियों और राज्य व जिला स्तरीय रिसोर्स पर्सन को यह निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि गर्मी को देखते हुए सुबह 10 बजे के बाद बच्चों की आउटडोर गतिविधियां नहीं कराई जाएं। विद्यालयों में ऐसा मित्रवत माहौल बनाया जाए, जहां बच्चे खुलकर अपनी बात रख सकें और शिक्षक उनके मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। स्कूल चलो अभियान का दूसरा चरण भी शुरू किया जाएगा।
इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तीन वर्ष के बच्चों के अभिभावकों से संपर्क कर उन्हें बाल वाटिका से जोड़ेंगी, जबकि छह वर्ष या उससे अधिक आयु के बच्चों का विद्यालयों में नामांकन सुनिश्चित किया जाएगा। शिक्षकों को कक्षा पांच से छह में बच्चों के सुचारु प्रवेश और संक्रमण काल को सहज बनाने की जिम्मेदारी दी गई है।
उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर के अनुसार पढ़ाई होगी। जो बच्चे अपेक्षित सीखने के स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, उनके लिए कैच-अप ट्रेनिंग चलाकर विशेष सहयोग दिया जाएगा। शिक्षकों को बच्चों का लगातार आकलन कर नियमित फीडबैक देने और बेहतर कक्षा शिक्षण पद्धतियां अपनाने के निर्देश दिए गए हैं।
विद्यालयों में पढ़ने की संस्कृति विकसित करने के लिए बच्चों को पुस्तकालय से पुस्तकें जारी की जाएंगी और प्रतिदिन कम से कम आधे घंटे पठन गतिविधि कराई जाएगी। बच्चों को लेखन, कला और संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के अवसर भी दिए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि 22 जून से विद्यालय प्रशासनिक कार्यों के लिए खुल चुके हैं, जबकि 25 जून से नियमित शिक्षण शुरू होगा। यह व्यवस्था आगामी वर्षों में भी लागू रहेगी। वर्ष में कम से कम 220 दिन पढ़ाई सुनिश्चित की जाएगी और यह भी देखा जाएगा कि वास्तविक शिक्षण कितने घंटे हुआ।
निपुण अभियान का विस्तार अब कक्षा एक और दो से आगे बढ़ाकर कक्षा एक से पांच तक किया जाएगा। बच्चों के भाषा और गणित के बुनियादी कौशल विकसित करने के लिए हिंदी, अंग्रेजी और गणित के सरल निपुण लक्ष्य तय किए जा रहे हैं। राज्य स्तरीय रिसोर्स पर्सन (एसआरपी) का प्रशिक्षण छह जुलाई से शुरू होगा, जबकि नवंबर-दिसंबर में निपुण आकलन कराया जाएगा।
उन्होंने कहा कि एसआरपी, एसआरजी और मेंटर शिक्षक केवल निरीक्षण या चेकलिस्ट भरने तक सीमित न रहें, बल्कि शिक्षकों के साथ संवाद कर उनकी शैक्षणिक कमियों को दूर करने में सहयोग करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले शिक्षकों के अनुभवों को शिक्षा संकुलों में साझा किया जाएगा।
शिक्षक दीक्षा पोर्टल, आइ-गाट प्लेटफार्म और ‘द टीचर ऐप’ के माध्यम से प्रशिक्षण सामग्री, लेसन प्लान और एनसीईआरटी की गाइडलाइन का अध्ययन कर अपने शिक्षण को बेहतर बना सकते हैं। साथ ही अभिभावकों और समुदाय से संवाद मजबूत करें।
उन्होंने शिक्षकों से स्वयं पढ़ने की आदत विकसित करने, समय प्रबंधन सीखने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की अपील की। मुंशी प्रेमचंद का उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षक समाज निर्माण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं और सकारात्मक सोच के साथ हर लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है।

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