नई दिल्ली.
लोकसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं और केंद्र में नई सरकार के गठन की कवायद तेज हो चुकी है. जो सांसद चुनाव जीतकर सामने आए हैं, उनमें पंजाब की खडूर साहिब सीट से जीतकर आए अमृतपाल सिंह और जम्मू-कश्मीर की बारामूला सीट से चुनाव जीतने वाले शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर रशीद भी शामिल हैं. अमृतपाल सिंह पर खालिस्तान समर्थक एजेंडा फैलाने का आरोप है. उसे गिरफ्तार करके असम की डिब्रूगढ़ जेल में भेज दिया गया है. जबकि कश्मीर में टेरर फंडिंग का आरोपी इंजीनियर रशीद 9 अगस्त 2019 से तिहाड़ जेल में बंद है. सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ये दोनों दूसरे सांसदों के साथ शपथ लेंगे और उनके साथ सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकेंगे?
कानून के जानकार बताते हैं कि इसके बारे में नियम बहुत साफ हैं. चुनाव जीतने के बाद एक सांसद के तौर पर शपथ लेना देश के किसी भी नागरिक का संवैधानिक अधिकार है. अब इस मामले में देखा जाए तो अमृतपाल सिंह और इंजीनियर रशीद दोनों जेल में हैं. इसलिए उनको शपथ लेने के लिए संसद भवन में आने के लिए स्पेशल मंजूरी लेनी होगी. शपथ लेने के बाद उन दोनों को बैरंग वापस जेल में लौट जाना होगा. मगर उन दोनों को संसद की कार्यवाही में हिस्सा लेने अनुमति नहीं दी जा सकती है.
इसके अलावा कभी भी इन दोनों की संसद सदस्यता रद्द होने का खतरा भी बना रहने वाला है. जैसे ही अमृतपाल सिंह या इंजीनियर रशीद को 2 साल से ज्यादा की सजा होगी, वे दोनों संसद की सदस्यता के अयोग्य घोषित कर दिए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कहा है कि 2 साल से ज्यादा की सजा पाने वाले सांसदों का सदस्यता को तत्काल प्रभाव से खत्म कर दिया जाना है. गौरतलब है कि खालिस्तान समर्थक अमृतपाल सिंह को गिरफ्तार कर अप्रैल 2023 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत असम की डिब्रूगढ़ जेल भेज दिया गया था. वहीं शेख अब्दुल रशीद उर्फ इंजीनियर रशीद आतंकवाद की फंडिंग के आरोप में 9 अगस्त 2019 से तिहाड़ जेल में कैद है.

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