सतना
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे गोविन्द नारायण सिंह द्वारा अपने ही बेटे शिव बहादुर सिंह को बेची गई सतना की 11.57 एकड़ जमीन के स्वामित्व को संदेहास्पद माना है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि गोविन्द नारायण सिंह ने अपंजीकृत और अपर्याप्त स्टाम्प पर बनी सेल डीड के आधार पर विवादित जमीन बेची थी। ऐसे दस्तावेजों के आधार पर न तो जमीन का स्वामित्व मिलता है और न ही अस्थाई निषेधाज्ञा। हाईकोर्ट ने अधीनस्थ अपीलीय अदालत के उस आदेश को उचित निरूपित किया, जिसमें ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई अस्थायी रोक को निरस्त कर दिया गया था। इसके साथ ही पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों की ओर से दायर याचिका निरस्त कर दी।
याचिकाकर्ता अंबिकापुर, छत्तीसगढ़ निवासी नर्मदेश्वर प्रताप सिंह, रामेश्वर प्रताप सिंह और सतना निवासी माधवी सिंह की ओर से पक्ष रखा गया। दलील दी गई कि उनके पिता शिव बहादुर सिंह ने वर्ष 1992 में अपने पिता गोविन्द नारायण सिंह से अपंजीकृत सेल डीड के जरिए 11.57 एकड़ भूमि खरीदी थी। वह भूमि वर्षों से उनके कब्जे में है। इसी आधार पर स्थायी निषेधाज्ञा चाही गई। अधीनस्थ अदालत ने पांच फरवरी, 2025 को उनके पक्ष में अस्थायी निषेधाज्ञा दे दी थी।
विवादित जमीन के असली मालिक सेठ मनोहर लाल थे। मनोहर लाल की कथित पावर आफ अटार्नी के आधार पर पूर्व मुख्यमंत्री गोविन्द नारायण सिंह ने 11.57 एकड़ जमीन अपने बेटे शिव बहादुर सिंह को आठ दिसंबर, 1992 को बेची थी। वर्ष 1998 में जमीन का नामांतरण भी हुआ। ट्रायल कोर्ट द्वारा पांच फरवरी, 2025 को पूर्व मुख्यमंत्री के वारिसों को दी गई अस्थाई निषेधाज्ञा के विरुद्ध सेठ मनोहर लाल के वारिसों ने जिला अदालत में अपील दायर की। जिला अदालत ने 13 अक्तूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त करके अस्थाई निषेधाज्ञा हटा दी थी। इस पर यह मामले पूर्व मुख्यमंत्री गोविन्द नारायण सिंह के वारिसों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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