अमेरिका से सभी मांगें पूरी होने तक होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलेगा ईरान, गालिबाफ ने चेताया

तेहरान  
  मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और संघर्ष के बीच ईरान ने मंगलवार को एक नई और सख्त चेतावनी जारी की है। ईरान की संसद के अध्यक्ष और देश के शीर्ष वार्ताकारों में शामिल मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कहा है कि रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक अमेरिका तेहरान की सभी प्रमुख मांगें पूरी नहीं कर देता।

उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान किसी भी तरह का समझौता या रियायत तब तक स्वीकार नहीं करेगा, जब तक वाशिंगटन अपनी तरफ से दिए गए वादों को अमल में नहीं लाता। गालिबाफ के मुताबिक, इन मांगों में सबसे महत्वपूर्ण है ईरानी बंदरगाहों पर लगाई गई नौसैनिक नाकाबंदी को तुरंत हटाना। इसके अलावा तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों को समाप्त करना और ईरान की विदेशों में जमी परिसंपत्तियों को अनफ्रीज करना भी प्रमुख शर्तों में शामिल है।

नहीं खुलेगा होर्मुज…
सरकारी टेलीविजन पर बोलते हुए गालिबाफ ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि मैं साफ-साफ और दो टूक कहना चाहता हूं कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक नहीं खोला जाएगा, जब तक समझौता ज्ञापन (MoU) में तय अमेरिकी वादे पूरी तरह पूरे नहीं हो जाते। नाकाबंदी हटाना, तेल पर लगे बैन का खात्मा और हमारे एसेट्स को रिहा करना, ये हमारी मुख्य मांगें हैं और इन पर कोई समझौता नहीं हो सकता।

समाप्त हो गया ईरान अमेरिका समझौता
बता दें कि यह बयान ऐसे नाजुक समय में आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच हुए 60 दिन के समझौता ज्ञापन (MoU) की समयसीमा सोमवार (17 अगस्त) को समाप्त हो रही है। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाजी तेज हो गई है और तनाव काफी बढ़ गया है। गालिबाफ के इस बयान को तेहरान की तरफ से एक सख्त संदेश माना जा रहा है कि अगर अमेरिका अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल नहीं करता, तो होर्मुज स्ट्रेट बंद रखने का फैसला जारी रहेगा।

संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं
गौरलतब है कि होर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया के तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में ईरान की इस चेतावनी से अंतरराष्ट्रीय बाजारों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर और दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। गालिबाफ ने अपने बयान में दोहराया कि ईरान शांति चाहता है, लेकिन अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों पर कोई समझौता नहीं करेगा।