नई दिल्ली
जॉब ऑफर देकर नौकरी देने से मुकरने वाली 20 से ज्यादा कंपनियों को आईआईटी संस्थानों ने कैंपस प्लेसमेंट में आने से बैन कर दिया है। इन कंपनियों ने पिछले एकेडमिक वर्ष में स्टूडेंट्स को दिए गए जॉब ऑफर कैंसल कर दिए थे। कुछ कंपनियां तो इस साल जून या जुलाई में जॉइनिंग के समय नौकरी देने से पीछे हट गई थीं। आईआईटी अधिकारियों ने बताया कि नियमों के मुताबिक जिन स्टूडेंट्स को पहले से ही कोई ऑफर मिल चुका होता है, उन्हें अक्सर आगे के इंटरव्यू में बैठने की इजाजत नहीं मिलती। ऐसे में ऐन मौके पर कंपनियों द्वारा नौकरी देने से मुकरने पर इन स्टूडेंट्स के करियर को काफी नुकसान हुआ, उनके पास ऑप्शन नहीं बचे और उनकी मेंटल हेल्थ पर भी असर पड़ा।
आईआईटी प्लेसमेंट अधिकारियों ने कंपनियों के पुराने रिकॉर्ड भी देखे, जिसमें पाया गया कि इनमें से कुछ कंपनियों का ऑफर रद्द करने का इतिहास रहा है। कुछ कंपनियों ने ऑफर लेटर में दिया गया सैलरी पैकेज कम कर दिया। प्लेसमेंट के समय जो ऑफर दिया गया था, असल सैलरी उससे काफी कम थी। सभी बातों पर गौर करते हुए आईआईटी संस्थानों ने एक राय के साथ इन कंपनियों को मौजूदा प्लेसमेंट साइकिल से बैन करने का फैसला किया। प्रतिबंधित कंपनियों में से कुछ डेटा एनालिटिक्स और सॉफ्टवेयर बेस्ड फर्म हैं। हालांकि उन्हें ऑफ कैंपस भर्ती प्रक्रिया से स्टूडेंट्स को नौकरी पर रखने की इजाजत है।
कंपनियों के धोखे से प्रभावित छात्रों की मदद के लिए तैयार आईआईटी
कंपनियों के धोखे से प्रभावित छात्रों की मदद के लिए सभी आईआईटी संस्थान एक हैं। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक प्लेसमेंट प्रक्रिया में शामिल एक आईआईटी प्रोफेसर ने कहा कि हाल ही में 15 आईआईटी के प्लेसमेंट कोऑर्डिनेटर्स ने कंपनियों के नामों को क्रॉस-वेरिफाई किया था। प्रोफेसर ने कहा, “हमने उनके पिछले रिकॉर्ड भी देखे। इनमें से कुछ कंपनियों का ऑफर कैंसिल करने का इतिहास रहा है और छह से सात आईआईटी ने उन्हें पहले ही हिस्सा लेने से बैन कर दिया था। कुछ कंपनियों ने ऑफर कैंसिल कर दिए हैं, जहां कुछ एल्युम्नाई काम कर रहे हैं। कुछ कंपनियां ऐसी भी थीं जिन्होंने लेटर में दिए गए सैलरी पैकेज कम कर दिए थे। प्लेसमेंट सेल इन कंपनियों के बड़े अधिकारियों से बात करने की कोशिश कर रहे हैं।'
प्रभावित छात्रों को कहीं और से मिल गए ऑफर
ऐन वक्त पर कंपनियों की ओर से गच्चा दिए जाने के मुद्दे पर बात करते हुए आईआईटी बॉम्बे के 2025 बैच के एक कंप्यूटर साइंस ग्रेजुएट ने कहा कि उन्हें पिछले दिसंबर में एक ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म ने नौकरी दी थी और उनकी जॉइनिंग डेट 1 जून, 2025 थी। छात्र ने कहा, 'मेरा ऑफर 29 मई को कैंसिल कर दिया गया था। कंपनी ने मुझे लगभग 30 लाख रुपये का ऑफर दिया था और मैं जॉइन करके बहुत खुश था। उन्होंने मेरे जॉइन करने से ठीक दो दिन पहले मेरा ऑफर कैंसिल कर दिया, लेकिन खुशकिस्मती से मुझे कुछ समय बाद एक एल्युम्नाई के जरिए बेहतर ऑफर मिल गया। हालांकि आईआईटी बॉम्बे ने मदद का हाथ बढ़ाया था लेकिन तब मुझे इसकी जरूरत नहीं थी।' उन्होंने कहा कि उनके कुछ दोस्तों के ऑफर भी कैंसिल कर दिए गए थे, लेकिन उनमें से कुछ को दूसरे ऑफर मिल गए। उन्होंने कहा, 'जून और जुलाई तक इंस्टिट्यूट के लिए भी प्लेसमेंट में मदद करना मुश्किल हो जाता है क्योंकि प्रोसेस का फेज-II एकेडमिक वर्ष के आखिर तक खत्म हो जाता है।'
प्रोफेसर ने आगे कहा कि इस साल आईआईटी ने भी विकसित भारत प्रोग्राम के तहत केंद्र द्वारा प्रोत्साहित किए गए स्टार्ट-अप्स की भागीदारी पर ज्यादा जोर देने का फैसला किया है। उन्होंने कहा, 'जॉब मार्केट धीमा है, लेकिन हम और भी कई कंपनियों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।' उन्होंने कहा कि अभी तक प्लेसमेंट सीजन अच्छा लग रहा है।

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