कोलकाता
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बीते कुछ सप्ताह में लगातार यह आरोप लगाए हैं कि केंद्र सरकार के द्वारा बंगाली भाषाओं को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे ‘भाषाई आतंकवाद’ का नाम भी दिया है। इस बीच केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बड़ा दावा किया है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को कहा है कि पश्चिम बंगाल और आस-पास के कुछ क्षेत्रों में व्यवस्थित तरीके से घुसपैठ करवाया जा रहा है और इस काम के लिए कई एजेंट भी सक्रिय हैं।
बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में भारत के नागरिक ना होने के संदेह में बंगाली भाषी मुस्लिम प्रवासियों को हिरासत में लिए जाने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शुक्रवार को कहा कि सिर्फ बंगाल में ही नहीं बल्कि कई इलाकों में घुसपैठ हो रहा है। उन्होंने रोहिंग्याओं का भी जिक्र किया। तुषार मेहता ने आगे बताया," रोहिंग्याओं के साथ-साथ एक व्यवस्थित गिरोह भी है। कई आतंकवादी भी घुसपैठ कर रहे हैं।"
वहीं याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील प्रशांत भूषण ने सुनवाई के दौरान कहा कि एक महिला को बिना जांच किए देश से बाहर निकाल दिया गया। उन्होंने कहा, “वह गर्भवती है। सिर्फ इसलिए कि वह बंगाली बोलती है, सरकार कह रही है कि वह एक बांग्लादेशी है। इस देश में कोई भी अधिकारी किसी व्यक्ति को बिना यह जांच किए सीमा पार कैसे धकेल सकता है कि वह विदेशी है या नहीं? ऐसा करना अंतर्राष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।”
केंद्र सरकार से सवाल
इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाला बागची की पीठ ने केंद्र सरकार से सवाल किया कि क्या लोगों को भाषा के आधार पर उठाया जा रहा है। पर एसजी मेहता ने जवाब दिया कि भाषा के आधार पर किसी को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
कोर्ट ने केंद्र से पूछा, "दो महत्वपूर्ण मसले हैं। एक राष्ट्र की सुरक्षा और अखंडता, और यह सर्वोपरि है। दूसरा प्रश्न विरासत और संस्कृति का है। पंजाब और बंगाल दोनों जगह भाषा एक ही है पर सीमा पर विभाजन है। हम चाहते हैं कि आप अपना रुख स्पष्ट करें।" इस पर जवाब देते हुए SG मेहता ने कहा कि फिर प्रभावित लोगों के बजाय कोई समूह ही सुप्रीम कोर्ट क्यों आते हैं? लोग व्यक्तिगत रूप से लोग क्यों नहीं आते? यह एक समस्या है। भारत दुनिया के अवैध प्रवासियों की जगह नहीं है। एक व्यवस्था होती है। उन्हें बताना होगा कि वे भारत में क्यों रह रहे हैं।"

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