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मुंबई
महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी चलाने वालों के लिए आने वाले कुछ महीने काफी अहम होने वाले हैं. अगर आप ओला, उबर, रैपिडो जैसे प्लेटफॉर्म के साथ पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे हैं, तो अब ज्यादा समय नहीं बचा है. राज्य सरकार ने बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को अपनी फ्लीट पेट्रोल से इलेक्ट्रिक करने के लिए समयसीमा तय कर दी है. पेट्रोल से इलेक्ट्रिक पर जाने के लिए ज्यादातर ऑपरेटरों को 6 महीने का समय दिया गया है, जबकि कुछ लाइसेंस होल्डर्स को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत मिलेगी।
महाराष्ट्र ट्रांसपोर्ट डिपार्टमेंट ने अक्टूबर में बाइक-टैक्सी एग्रीगेटर्स और रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस (RTO) को इस संबंध में पत्र भेजा है. यह कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश के बाद उठाया गया. सरकार के फैसले के मुताबिक, महाराष्ट्र में बाइक टैक्सी सेवाओं को तय समयसीमा के भीतर 100% इलेक्ट्रिक फ्लीट की ओर जाना होगा. यानी पेट्रोल बाइक से चल रही सेवाओं को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलना होगा।
पेट्रोल बाइक वालों को कितने महीने मिलेंगे?
अभी पेट्रोल बाइक टैक्सी चला रहे ऑपरेटरों के लिए पहला चरण 6 महीने का है. इसी अवधि में उन्हें इलेक्ट्रिक वाहन की अनिवार्यता पूरी करने की दिशा में आगे बढ़ना होगा. हालांकि, महाराष्ट्र बाइक टैक्सी रूल्स, 2025 के तहत प्रोविजनल या टेंपररी लाइसेंस वाले ऑपरेटरों को 3 महीने की अतिरिक्त मोहलत दी गई है. यानी इन ऑपरेटरों के लिए कुल समय 9 महीने तक हो सकता है।
एग्रीगेटर्स ने मांगी थी 2030 तक की मोहलत
ओला, उबर, रैपिडो जैसे बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स ने इस बदलाव के लिए ज्यादा समय चाहती थीं. एग्रीगेटर्स ने सरकार से 2030 तक की मोहलत देने की मांग की थी. उनका कहना था कि पूरी फ्लीट को इलेक्ट्रिक व्हीकल में बदलने में समय लगेगा. कंपनियों ने अपनी मांग के पीछे महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी और बड़े स्तर पर वाहनों को बदलने में आने वाली चुनौतियों का हवाला दिया था. लेकिन सकार ने 203र0 तक की मोहलत देने के बजाय मौजूदा समयसीमा तय की है।
बाइक टैक्सी राइडर्स के सामने चुनौती
सिर्फ कंपनियां ही नहीं, बाइक टैक्सी चलाने वाले राइडर भी इस बदलाव को लेकर अपनी चिंता जता चुके हैं. सितंबर में महाराष्ट्र बाइक टैक्सी वेलफेयर एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और दूसरे अधिकारियों को पत्र लिखकर बदलाव के लिए 1.5 साल का समय मांगा था. एसोसिएशन के अध्यक्ष अमित गावडे के मुताबिक, ज्यादातर बाइक टैक्सी राइडर मिडिल या लोअर-मिडिल क्लास परिवारों से आते हैं. ऐसे में अचानक इलेक्ट्रिक बाइक खरीदने के लिए बड़ा निवेश करना उनके लिए आसान नहीं है. राइडरों ने चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी लाइफ को लेकर भी चिंता जताई थी. यानी उनके लिए मामला सिर्फ बाइक बदलने का नहीं, बल्कि उसे चलाने की लागत और चार्जिंग की सुविधा से भी जुड़ा है।
पहले 50:50 मॉडल पर हुई थी चर्चा
महाराष्ट्र सरकार ने शुरुआत में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक बाइक को साथ चलाने वाले 50:50 मॉडल पर भी विचार किया था. इसमें कंपनियों को अपने बेड़े में पेट्रोल और इलेक्ट्रिक दोनों तरह की मोटरसाइकिल रखने की अनुमति देने की बात थी. परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक के मुताबिक, कैबिनेट ने इस मॉडल को मंजूरी नहीं दी. सरकार को आशंका थी कि ज्यादा लागत के कारण कंपनियां इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद को टाल सकती हैं।

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