कांकेर/बालोद
कांकेर में रहने वाले अजय मंडावी व बालोद जिले के लाटाबोड़ निवासी डोमार सिंह कुंवर को बुधवार की शाम राष्ट्रपति भवन में आयोजित सम्मान समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पद्मश्री से सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने पुरस्कार लेने से पूर्व अतिथियों का अभिवादन किया, जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह सहित समस्त देशभर के दिग्गज मौजूद रहे।
पुरस्कार मिलने के बाद डोमार सिंह ने कहा कि इतने वर्षों की तपस्या का यह परिणाम है। यह मेरा नहीं पूरे बालोद और छत्तीसगढ़वासियों का सम्मान है। उन्होंने कहा कि यहां पर नाचा जो मूल विधा है छत्तीसगढ़ की, उनके लिए उन्हें सम्मान मिला और मैं छत्तीसगढ़ के लिए कुछ कर पाया। डोमार ने बताया कि जब वह 12 साल का था तब से नाचा की प्रस्तुति दे रहे हैं। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा था कि उनकी यह मेहनत यह फल देगी। सम्मान के लिए उनका नाम पुकारा गया। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिला तो उनकी आंखें नम हो गई। आंखों में खुशी के आंसू थे और पूरा परिवार और समाज जश्न मना रहा है।
कांकेर जिले में रहने वाले अजय मंडावी ने बचपन से ही अपनी विरासत में सीखे कला को आगे बढ़ाने का फैसला कर लिया था। अपने पिता व माता से सीखे कलाओं को जेल में 2005 से बंद कैदियों को सीखने के साथ ही उन्हें जिंदगी जीने की राह दिखाई। उन्होंने 400 से अधिक कैदियों को काष्ठ कला सिखाकर आत्म निर्भर बनाया। लकड़ी पर कलाकारी करते हुए उन्होंने बाइबल, भगवत गीता, राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान, प्रसिद्ध कवियों की रचनाएं को उकेरने का काम किया। अजय कुमार का पूरा परिवार आज किसी न किसी कला से जुड़ा हुआ है। कहीं न कहीं उन्हें यह कला विरासत में मिली है।

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