AI तकनीक से बदलेगी काशी की यातायात व्यवस्था, स्मार्ट बनेगा भीड़ प्रबंधन

वाराणसी
 दिव्य और भव्य काशी में आने वाले देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं को अब ट्रैफिक और भीड़-भाड़ के कारण असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप वाराणसी को अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जा रहा है। 'टोयोटा मोबिलिटी फाउंडेशन' के वैश्विक 'सस्टेनेबल सिटीज़ चैलेंज' के तहत चुनी गईं चार प्रमुख कंपनियां अब एआई (AI) सेंसर, जेनरेटिव एआई, डिजिटल साइनेज, कलर कोडिंग और नेविगेशन ऐप्स के जरिए शहर के यातायात व भीड़ प्रबंधन को पूरी तरह हाईटेक बनाने जा रही हैं।

दुनिया भर के सैकड़ों शहरों के बीच वेनिस और डेट्रॉइट जैसी वैश्विक पहचान वाले शहरों के साथ प्रतिस्पर्धा करते हुए वाराणसी ने इस अंतर्राष्ट्रीय प्रोजेक्ट में अपना स्थान बनाया है। पायलट प्रोजेक्ट के सफल परीक्षण के बाद अब वाराणसी नगर निगम और स्मार्ट सिटी द्वारा इसका बड़े पैमाने पर विस्तार किया जा रहा है।

4 घंटे पहले मिलेगा अलर्ट, AI कैमरे संभालेंगे मोर्चा
भीड़ नियंत्रण के लिए 'सिटीफ्लो'  तकनीक का उपयोग किया जा रहा है, जो बिग डेटा और एआई सेंसर की मदद से 4 घंटे पहले ही संभावित भीड़ का सटीक अनुमान लगा लेगी। शहर में लगे एआई कैमरे और सेंसर रियल-टाइम डेटा कंट्रोल रूम को भेजेंगे, जिससे पुलिस और प्रशासन को तुरंत डाइवर्जन और त्वरित कार्रवाई करने में मदद मिलेगी। पायलट फेज में लगे 8 एआई सेंसर्स की संख्या को बढ़ाकर जल्द ही 50 से अधिक किया जाएगा। विशेष रूप से जंगमबाड़ी से मैदागिन तक एआई कैमरों और डिजिटल साइनेज का जाल बिछाया जाएगा।

गलियों में 'कलर कोडिंग' और म्यूरल: राह दिखाएंगी सड़कें
'जनजात्रा' संस्था द्वारा तैयार की जा रही इस विशेष योजना के तहत काशी की पारंपरिक गलियां और सड़कें खुद बाबा विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाटों का मार्ग दिखाएंगी।

    पीली लाइन: श्री काशी विश्वनाथ मंदिर का मार्ग दर्शाएगी।

    नीली लाइन: ऐतिहासिक गंगा घाटों की ओर ले जाएगी।

    लाल लाइन: यात्रियों को वापस उनके पिकअप पॉइंट तक सुरक्षित पहुंचाएगी।

    इसके अलावा, गलियों की दीवारों पर पारंपरिक म्यूरल पेंटिंग्स और डिजिटल साइनेज लगाए जाएंगे, जो अत्यधिक भीड़ होने पर यात्रियों को वैकल्पिक रास्तों का सुझाव देंगे।

'बेहतर-वे' ऐप से स्थानीय दुकानों और गलियों को मिलेगा फायदा
'वोजिक एआई' द्वारा विकसित किया जा रहा "बेहतर-वे" ऐप रियल-टाइम डेटा की मदद से श्रद्धालुओं को भीड़-भाड़ वाले रास्तों से बचाते हुए शांत और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध वैकल्पिक गलियों से गंतव्य तक पहुंचाएगा। इस ऐप से स्थानीय छोटे दुकानदारों की जानकारी भी श्रद्धालुओं को मिलेगी, जिससे स्थानीय व्यापार और अर्थव्यवस्था को सीधा आर्थिक लाभ होगा।

दिव्यांगजन, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं के लिए 'नई चाल'
'प्रमेया कंसल्टिंग' के एआई-संचालित इकोसिस्टम 'नई चाल' के जरिए अस्सी घाट से मणिकर्णिका घाट तक दिव्यांगों, वरिष्ठ नागरिकों और गर्भवती महिलाओं के लिए बाधा-मुक्त और सुगम आवागमन व्यवस्था तैयार की जा रही है। गोदौलिया से दशाश्वमेध घाट तक पायलट प्रोजेक्ट के तहत रैंप, चेंजिंग रूम और व्हीलचेयर जैसी सुविधाओं की जानकारी देने के लिए विशेष सूचना केंद्र स्थापित किए गए हैं।

नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि वाराणसी नगर निगम, वाराणसी स्मार्ट सिटी, चैलेंज वर्क्स और वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (WRI) इंडिया के सहयोग से शुरू हुआ यह प्रोजेक्ट अगले दो वर्षों में पूर्ण रूप से धरातल पर उतरकर काशी के स्वरूप को तकनीक और परंपरा का अद्भुत केंद्र बनाएगा।