श्रीनगर
केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर के दो संगठनों 'जम्मू-कश्मीर इत्तिहादुल मुस्लिमीन' और 'आवामी एक्शन कमेटी' को गैरकानूनी संगठन घोषित कर दिया है. गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर यह जानकारी साझा की. उन्होंने कहा कि ये संगठन लोगों को भड़काने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के लिए जिम्मेदार पाए गए हैं, जिससे देश की एकता और अखंडता को खतरा हो सकता था.
UAPA के तहत प्रतिबंध क्यों?
गृह मंत्रालय के अनुसार, इन संगठनों की गतिविधियों से यह साफ हुआ कि वे जम्मू-कश्मीर में अशांति फैलाने की साजिश रच रहे थे. उनके बयानों और कार्यों से लोगों को हिंसा के लिए उकसाया जा रहा था, जिससे कानून-व्यवस्था पर खतरा मंडरा रहा था.
वहीं, अमित शाह ने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार किसी भी राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं करेगी. देश की शांति, व्यवस्था और संप्रभुता के खिलाफ काम करने वालों को करारा जवाब दिया जाएगा.
सरकार के अनुसार उमर फारूक के नेतृत्व वाली अवामी एक्शन कमेटी जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में अलगाववाद को प्रोत्साहन देते हुए आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने और भारत विरोधी प्रचार-प्रसार में शामिल रही है। अधिसूचना में कहा गया है कि उक्त समूह भारत की अखंडता, संप्रभुता और सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों में लिप्त रहा है। सरकार ने ए.ए.सी. पर गैरकानूनी गतिविधियों के लिए धन जुटाने, अलगाववादियों को समर्थन प्रदान करने तथा संविधान के प्रति अनादर दिखाने का आरोप लगाया है।

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