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रायपुर
यौन शोषण केस में घिरे छत्तीसगढ़ के निलंबित IPS अधिकारी रतनलाल डांगी मामले की जांच अब IPS पारुल माथुर करेंगी। पीड़िता की आपत्ति के बाद IPS प्रशांत अग्रवाल की जगह महिला IPS पारुल माथुर को पक्ष रखने की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, ADG दीपांशु काबरा को जांच अधिकारी बनाया गया है। प्रारंभिक जांच में रतनलाल डांगी पर लगे आरोप सही पाए गए हैं। आइए जानते हैं IPS पारुल माथुर कौन हैं।
कौन हैं IPS पारुल माथुर
पारुल माथुर छत्तीसगढ़ कैडर की 2008 बैच की आईपीएस अधिकारी है। वह छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर की रहने वाली हैं। उनके पिता राजीव माथुर भी 1974 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। पिता को पुलिस में देखकर ही पारुल माथुर ने IPS अधिकारी बनने का फैसला किया था। राजीव माथुर की तीन बेटियां हैं। उसमें से पारुल माथुर दूसरे नंबर की हैं।
पारुल माथुर पहली लोकल छत्तीसगढ़िया आईपीएस हैं। माथुर छत्तीसगढ़ प्रदेश से यूपीएससी क्रैक करने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। उनका जन्म 15 मार्च 1982 को दिल्ली में हुआ है। उनके पिता राजीव माथुर आईपीएस अफसर रहें है और डीजी रैंक से सेवानिवृत हुए हैं। उनकी माता रेखा माथुर शिक्षिका थीं। पारुल माथुर की बड़ी बहन पायल माथुर विदेश में रहती हैं। वह फाइनेंस सेक्टर में काम करती हैं। जबकि छोटी बहन बिलासपुर के सिम्स अस्पताल में डॉक्टर हैं।
रायपुर में की 12वीं तक की पढ़ाई
छत्तीसगढ़ के गठन से पहले उनका परिवार रायपुर आ गया था। उन्होंने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई रायपुर में की। इसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पारुल माथुर ने बीए किया। पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद पारुल माथुर ने यूजीसी– नेट,जे आरएफ की परीक्षा भी क्वालीफाई की। एमफिल करने के दौरान दूसरे प्रयास में पारुल माथुर का यूपीएससी में सलेक्शन हो गया।
कई जिलों की एसपी रहीं
पारुल माथुर ने 1 सितंबर 2008 को ज्वाइन किया। बतौर एसपी उन्होंने पहली बार बेमेतरा जिले की कमान संभाली। इसके अलावा वह रेलवे में भी एसपी रहीं। इस दौरान उन्होंने कई कार्यक्रम चलाए। उनकी गिनती सख्त IPS अधिकारी के तौर पर होती है। वह कई जिलों की एसपी रही हैं।
जांच अधिकारी बदलने की मांग की थी
दरअसल, रतनलाल डांगी मामले में पीड़िता SI की पत्नी ने प्राथमिक जांच में पक्षपात का आरोप लगाया था। पीड़िता ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि जांच अधिकारी रतन लाल डांगी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। मामले में पीड़िता ने किसी महिला IAS अधिकारी से जांच कराने की मांग की थी। पीड़िता की याचिका पर हाईकोर्ट ने राज्य शासन के गृह सचिव और DGP से जवाब मांगा था।

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