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जबलपुर
धान और अन्य फसलों की कटाई के बाद खेतों में नरवाई जलाने पर जिले में प्रतिबंध लगा दिया गया है। अपर जिला दंडाधिकारी नीता राठौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता-2023 की धारा 163 (2) के तहत आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से 60 दिनों तक लागू रहेगा।
उल्लंघन करने वालों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के प्रविधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश में यह स्पष्ट किया है कि फसल कटाई में उपयोग होने वाले कंबाइन हार्वेस्टर के साथ भूसा तैयार करने के लिए सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर अथवा बेलर लगाना अनिवार्य होगा। इन उपकरणों के बिना कटाई करते पाए जाने पर हार्वेस्टर तत्काल जब्त किया जा सकेगा।
जमीन के रकबे के अनुसार लगेगा जुर्माना
नरवाई जलाने पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के प्रावधानों के अनुसार पर्यावरण क्षतिपूर्ति राशि वसूली जाएगी। दो एकड़ से कम जमीन होने पर 2,500 रुपये, दो से पांच एकड़ से कम जमीन पर 5,000 रुपये और पांच एकड़ से अधिक कृषि भूमि होने पर 15,000 रुपये प्रति घटना के हिसाब से राशि देनी होगी।
प्रतिबंध के पालन की जिम्मेदारी उप संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास को नोडल अधिकारी के रूप में सौंपी गई है। ग्राम पंचायत स्तरीय निगरानी समिति उल्लंघन की जांच कर रिपोर्ट वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित तहसीलदार को देगी।
मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरण को नुकसान
तहसीलदार संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर देने के बाद सात दिनों के भीतर जुर्माने पर निर्णय लेंगे। किसानों को जागरूक करने के लिए गांवों में मुनादी कराने के निर्देश भी दिए गए हैं। आदेश में कहा गया है कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सेटेलाइट मैपिंग के जरिए खेतों में आग लगाने की घटनाओं पर निगरानी कर रही है।
नरवाई जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उपजाऊ ऊपरी परत, कार्बनिक पदार्थ और केंचुए जैसे मित्र कीट नष्ट होते हैं। इससे आसपास के गांवों, राजमार्गों और जंगलों में आग फैलने का खतरा भी रहता है।

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