लखनऊ
उत्तर प्रदेश में घुसपैठियों पर बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसी कड़ी में नेपाल सीमा के साथ ही बड़े शहरों में खुफिया एजेन्सियां, एटीएस और अन्य सुरक्षा से जुड़े संगठन तेजी से सक्रिय हो गए है। डीएम और कप्तान ने मातहतों को विदेशी नागरिकों के हर दस्तावेज की गम्भीरता से जांच करने के निर्देश दिए हैं।
पिछले कुछ वर्षों में सीमा पर स्थित जिलों में फर्जी पहचान पत्र के जरिए घुसपैठ की घटनाएं काफी बढ़ गई। इसका सीधा असर उत्तर प्रदेश में भी दिखाई पड़ा। इस पर यूपी में अवैध घुसपैठियों को कानून व्यवस्था के लिए चुनौती न बनने देने की दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। केन्द्र सरकार के निर्देश पर संदिग्ध गतिविधियों और फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं।
2016 में दो करोड़ बांग्लादेशी भारत में थे
वर्ष 2016 में तत्कालीन केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने संसद को बताया था कि लगभग दो करोड़ अवैध बांग्लादेशी भारत के अंदर रह रहे हैं। इसी तरह अवैध रोहिंग्यां प्रवासियों की संख्या भी 40 हजार से अधिक बताई गई थी। जांच में पाया गया कि यूपी के लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, वाराणसी और तेजी से विकसित हो रहे अन्य शहरों पर भी इनका विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। मुख्यमंत्री के निर्देश पर ही सभी जिलों में अस्थायी डिटेंशन सेन्टर बनाए जाने लगे हैं। अफसरों का कहना है कि घुसपैठियों के खिलाफ यह अभियान कानून-व्यवस्था, सामाजिक सदभाव और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने के साथ भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।

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