धार
हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ के आदेश के तहत ऐतिहासिक भोजशाला के भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा किए जा रहे सर्वे कार्य में 30वें दिन तीन भाषा विशेषज्ञ भी जुड़े। तीनों विशेषज्ञों ने भोजशाला के भीतरी परिसर में शिलालेख और अन्य हिंदू प्रतीक चिह्नों से प्लास्टिक की फिल्म हटवाई और प्राथमिक जांच की। सर्वे से पहले टीम ने शिलालेखों औऱ प्रतीक चिह्नों की सुरक्षा के लिए प्लास्टिक की फिल्म लगाई थी। रविवार को विशेषज्ञ शिलालेखों पर लिखे विषय को हिंदी और अंग्रेजी में अनुवादित करेंगे।
उर्दू व फारसी में लिखावट
परिसर में स्थित कमाल मौलाना की दरगाह में भी जो शिलालेख उर्दू या फारसी में हैं, उनके भी अध्ययन का कार्य विशेषज्ञों द्वारा किया जाएगा। उधर, भोजशाला के दक्षिण क्षेत्र में पाषाण का एक प्लेटफार्म मिला। उसकी सफाई की गई, वहां से मिट्टी हटाने का काम भी शुरू हुआ। बता दें कि एएसआइ टीम के लीडर अतिरिक्त महानिरीक्षक डा. आलोक त्रिपाठी भी धार पहुंच चुके हैं। उनके नेतृत्व में सर्वे कार्य में गति आई है।
हिंदू पक्ष के गोपाल शर्मा ने बताया कि शनिवार को व्यापक स्तर पर सर्वे किया गया है। उत्तर की दिशा में दीवार की लेवलिंग का कार्य तेज गति से हुआ। दक्षिण में एक प्लेटफार्म मिला है, जिसकी सफाई की गई। पश्चिम दिशा में भी खोदाई जारी है। भोजशाला की नींव और उससे संबंधित तथ्यों का पता किया जा रहा है। यज्ञ कुंड के पास में मिट्टी की खोदाई का कार्य भी जारी रहा। उधर, मुस्लिम पक्ष के अब्दुल समद ने बताया कि टीम के तीन नए सदस्यों ने दरगाह परिसर में करीब आधा घंटे तक कार्य किया। वहां उर्दू व फारसी में जो लिखावट है, उसे भी पढ़ा जाएगा।

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