नैनीताल
बंगाल की खाड़ी में कम वायुदाब की वजह से हिमालयन फुट हिल यानी हिमालय की तलहटी में वर्षा का दौर जारी है। इस बार मानसून राज्य में देरी से 29 सितंबर से चार अक्टूबर के बीच विदा होगा। ला नीना का असर शीतकाल में भारी बर्फबारी के रूप में देखने को मिल सकता है। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वायुमंडलीय वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह ने बताया कि पिछले दिनों हुई भीषण बारिश साइक्लोनिक का प्रभाव था और अब हो रही बारिश बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर के कारण हो रही है। लो प्रेशर का असर सीधा हिमालय की तलहटी में पड़ता है। जिस कारण बारिश होती है।
जलवायु परिवर्तन का दिखने लगा असर
पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के कारण बंगाल की खाड़ी में वायुदाब बनने की प्रक्रिया होने लगी है। इधर जलवायु परिवर्तन का एक बड़ा असर मानसून की बारिश में नजर आने लगा है। जिस कारण देश के पश्चिमी क्षेत्रों में अधिक बारिश होने लगी है। इसके अलावा मानसून के बादल सिमटकर पैचेज यानी खंडित होने लगे हैं। जिस कारण खंड वर्षा इस बार खूब देखने को मिली। अब ला नीना पैर पसारने लगा है। जिसका असर शीतकाल में भारी बर्फबारी के रूप में देखने को मिल सकता है। बहरहाल बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ पर अधिक निर्भर करेगी। यदि शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहे तो हिमपात जमकर होने की संभावना बनी रहेगी।

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