कोलकाता
दुर्गा पूजा से पहले बांग्लादेश से हिल्सा मछली, जिसे समुद्र की रानी भी कहा जाता है, की पहली खेप भारत-बांग्लादेश सीमा पर पहुंच चुकी है। आठ ट्रकों में करीब 32 टन मछली भारत आई है। बांग्लादेश ने हाल ही में त्योहारों को ध्यान में रखते हुए 1200 टन हिल्सा मछली के निर्यात को मंजूरी दी थी। यह आपूर्ति 16 सितंबर से 5 अक्टूबर के बीच होगी। प्रत्येक ट्रक में पद्मा नदी की लगभग चार टन मछलियां लदी हैं। मछली आयातक संघ के सचिव सैयद अनवर मकसूद ने बताया कि यह खेप थोक बाजारों में पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि एक किलो 'पद्मा हिल्सा' की कीमत ग्राहकों के लिए लगभग 1800 रुपये होगी। मकसूद ने आगे कहा कि अब लगभग हर दिन बांग्लादेश से मछलियां कोलकाता के बाजारों में आएंगी।
खुदरा विक्रेताओं में तनाव
इस कीमती खेप ने मछली प्रेमियों और व्यापारियों में उत्साह पैदा किया है, खासकर पद्मा नदी की हिल्सा के अनोखे स्वाद के कारण। हालांकि, ऊंची कीमतों के चलते खुदरा विक्रेता चिंतित हैं। सुबह-सुबह नीलामी के लिए जुटे खुदरा विक्रेताओं ने ऊंची दरों पर चिंता जताई। एक स्थानीय विक्रेता ने कहा कि मछली की गुणवत्ता शानदार है, लेकिन इसकी कीमत इतनी अधिक है कि इससे ज्यादा मुनाफा कमाने की उम्मीद नहीं है। अगर लोग इतनी ऊंची कीमत पर मछली खरीदेंगे, तभी हम कुछ लाभ कमा पाएंगे।
खुदरा बाजार में कीमतों के और बढ़ने की संभावना है, और अनुमान है कि कीमत 2000 रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक हो सकती है। इन मछलियों का आकार 800 ग्राम से 1 किलोग्राम तक बताया जा रहा है। एक अन्य विक्रेता ने स्थानीय मछलियों से प्रतिस्पर्धा का जिक्र करते हुए कहा कि पहले कुछ लोगों ने गुजरात से हिल्सा मंगवाई थी। दोनों का स्वाद अलग है, और बांग्लादेशी मछली की मांग हमेशा ज्यादा रहती है, लेकिन इस बार कीमत बहुत अधिक है।
क्या बोले अधिकारी?
अधिकारियों ने बताया कि बांग्लादेश सरकार ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि मछली की यह खेप उसकी निर्यात नीति 2024–27 के तहत होनी चाहिए, जिसमें न्यूनतम निर्यात मूल्य 12.5 अमेरिकी डॉलर प्रति किलोग्राम निर्धारित है। इस मंजूरी की वैधता 16 सितंबर से 5 अक्टूबर तक है।

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