भोपाल.
मध्य प्रदेश में बांध और सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित डूब क्षेत्र में आने वाली वन भूमि का सत्यापन अब पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर दर्ज आधिकारिक नक्शों के आधार पर किया जाएगा। वन विभाग ने जल संसाधन विभाग को स्पष्ट किया है कि पोर्टल पर अपलोड वन भूमि मानचित्र को ही सत्यापन का आधार बनाया जाए, ताकि प्रभावित क्षेत्र की सटीक पहचान और क्षतिपूर्ति प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी हो सके।
इस पहल का उद्देश्य भारत सरकार के महत्वाकांक्षी डिजिटल प्लेटफॉर्म का शासकीय कार्यों में अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है। इससे विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा और परियोजनाओं की स्वीकृति में लगने वाला समय भी घटेगा।
एकीकृत डाटा से मिलेगी सटीक जानकारी
पीएम गतिशक्ति पोर्टल पर वन भूमि के साथ-साथ रेलवे, राजस्व, जल संसाधन, सिंचाई, नदियां, खनन और सड़क नेटवर्क से जुड़ी जानकारी भी एकीकृत रूप से उपलब्ध है। इससे किसी परियोजना के लिए अलग-अलग विभागों में फाइलें भेजने की आवश्यकता कम होगी।
आपदा प्रबंधन में भी कारगर
पोर्टल पर भूस्खलन जोन, बाढ़ संभावित क्षेत्र, आबादी का स्वरूप, ऊंचाई, स्कूल, अस्पताल, परिवहन नेटवर्क, गोदाम, दूरसंचार नेटवर्क और मिट्टी की स्थिति जैसे डेटा मैप किए गए हैं। यह जानकारी आपदा प्रबंधन के दौरान जिला प्रशासन को त्वरित और सटीक निर्णय लेने में मदद करेगी। जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम (GIS) आधारित इस प्लेटफॉर्म से डूब क्षेत्र में आने वाली वन भूमि का सत्यापन अधिक पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ होगा, जिससे विकास और पर्यावरण संतुलन के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जा सकेगा।

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