बीजिंग
चीनी अर्थव्यवस्था पटरी से उतरती नजर आ रही है। चीन की चमकती तस्वीर की सामने जो धुंध छाई हुई है, उसे ड्रैगन खुद भी नहीं नकार सकता। चीन एक तरफ जहां दुनिया को ये दिखाने को कोशिश करता है कि वो दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वहीं इस देश में अपस्फीति एक असंतुलित अर्थव्यवस्था का संकेत है।
चीन में अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के कारण दैनिक जीवन की चीजों की कीमतों में लगातार कटौती हो रही है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग 70 रोजमर्रा के उत्पादों की कीमतें उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आंकड़ों से कहीं अधिक तेजी से गिरी हैं। खासकर उन वस्तुओं की कीमतों में भारी कटौती देखी गई है, जिन्हें आम उपभोक्ता खरीदते हैं।
झूठ के जाल में फंसा रहा चीन
चीन लगातार ही दुनिया से झूठ बोलता आ रहा है और अपनी सच्चाई कभी सामने नहीं आने देता। कोरोना काल के समय में भी चीन ने दुनिया से इस महामारी के बारे में छुपाया। वहीं दुनिया के सामने कोरोना की सच्चाई आने के बाद भी चीन ने अपने देश में कोरोना केस के सही आंकड़ों को छुपाया।
चीन अब इसी तरह दुनिया से अपनी अर्थव्यवस्था का सच भी छिपा रहा है। चीन की अर्थव्यवस्था पांच फीसदी की रफ्तार से बढ़ रही है, लेकिन एक सच ये भी है कि चीन कर्ज तले दबता जा रहा है। वहीं भारत के पड़ोसी मुल्क में रोजमर्रा की कीमतें सबसे निचले दाम पर पहुंच गई हैं।
चीन में उत्पादकता इतनी ज्यादा हो गई है कि सामान को खरीदने वाले लोग कम पड़ गए हैं। चीन में लोग सामान को ज्यादा से ज्यादा खरीदें, इसके लिए दैनिक जीवन में इस्तेमाल करने वाली चीजों की कीमत काफी हद तक कम कर दी गई हैं।
चीन पर बढ़ रहा घरेलू कर्ज
स्टेट एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ फॉरेन एक्सचेंज (SAFE) की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के अंत तक चीन पर सरकारी ऋण करीब 18.8 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर होने का अनुमान था। वहीं बाहरी ऋण लगभग 2.37 से 2.44 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर था।
चीन पर घरेलू कर्ज लगातार बढ़ता जा रहा है। ये कर्ज निजी सेक्टरों की वजह से विकराल रूप लेता जा रहा है। डलास की फेडरल रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक वित्तीय संकट (2007-09) के बाद चीन में ऋण वृद्धि का व्यापक दौर आया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 2016 में समाप्त हुए आठ वर्षों की अवधि में चीन के गैर-वित्तीय निजी क्षेत्र के ऋण का सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) से अनुपात 106 प्रतिशत से बढ़कर 188 प्रतिशत हो गया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2025 में चीन पर घरेलू कर्ज 2015 की तुलना में करीब दोगुना बढ़ गया। आज के समय में यही घरेलू कर्ज चीन की GDP का 100 गुना हो गया है।
चीन की GDP बढ़ने की वजह
चीन पर कर्ज बढ़ने के बाद भी सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। इसके पीछे की वजह है कि चीन अधिक मात्रा में निर्यात करता है।
आईएमएफ और विश्व बैंक के अनुमानों और आंकड़ों के अनुरूप, चीन की प्रति व्यक्ति जीडीपी में भारी वृद्धि हुई है, जो 2024-2025 में लगभग 13,300 डॉलर से 13,800 डॉलर अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गई है। चीन की जीडीपी 1960 के दशक में 100 डॉलर से भी कम हुआ करती थी, लेकिन भारी निर्यात के चलते आज से 13,000 डॉलर के पार पहुंच गई है।

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