बस्तर में नक्सलवाद के खात्मे का काउंटडाउन शुरू, 90 दिन में खत्म होगा 40 साल का आतंक

बस्तर 

बस्तर में नक्सलवाद खत्म करने का काउंटडाउन शुरू हो गया है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने 31 मार्च 2026 तक नक्सल मुक्त बस्तर बनाने की डेडलाइन तय की है। अब इस तारीख तक सिर्फ 90 दिन बचे हैं। 2025 में नक्सलवाद पर बड़ा अभियान चलाया गया।

डेढ़ साल में कुल 23 बड़े नक्सली मारे गए हैं। इनमें सबसे खूंखार नक्सली माड़वी हिड़मा, नक्सल संगठन सचिव बसवाराजू, गणेश उइके सहित 16 बड़े नक्सली शामिल हैं। भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे बड़े नक्सलियों ने अपने सैकड़ों साथियों के साथ हथियार डाल दिए हैं।

अब केवल पोलित ब्यूरो मेंबर देवजी, मिशिर बेसरा और गणपति तीन शीर्ष नक्सली बचे हैं, जो संगठन चला रहे हैं। बस्तर में पापाराव और देवा अपनी जान बचाने के लिए अब भी जंगल में घूम रहे हैं। पुलिस इनकी तलाश कर रही है।

बस्तर में 200 से 300 नक्सली बचे

नक्सल संगठन में बस्तर के अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 आर्म कैडर के नक्सली ही बचे हुए हैं, जो टुकड़ों में यहां-वहां छिपे हुए हैं। नक्सलियों का महाराष्ट्र-मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ (MMC) जोन पूरी तरह से खत्म हो गया है। उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन से भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो गया है।

अब फोर्स के लिए इन 90 दिनों में दक्षिण बस्तर डिवीजन को नक्सल मुक्त करना ही सबसे बड़ी चुनौती है। जानकारी के मुताबिक दक्षिण बस्तर के जंगलों में ही देवा और पापाराव अपने साथियों के साथ अलग-अलग टुकड़ियों में छिपे हुए हैं। जबकि मिशिर बेसरा झारखंड में है।

कुछ समय पहले देवजी की लोकेशन तेलंगाना-आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ के ट्राई जंक्शन में थी। हालांकि, वह बार-बार ठिकाने बदल रहा है। इन 90 दिनों में अगर ये 5 से 6 बड़े नक्सली मारे जाते हैं या सरेंडर करते हैं तो बस्तर के फ्रंट लाइन के सभी टॉप लीडर्स खत्म हो जाएंगे।

जानिए उन टॉप नक्सलियों के बारे में जिनकी पुलिस को तलाश है…

1 – थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजी (61)-

देवजी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू के एनकाउंटर के बाद नक्सल संगठन ने थिप्परी तिरुपति को नक्सल संगठन का महासचिव बनाया है। ये नक्सल संगठन में पोलित ब्यूरो मेंबर भी है।

वर्तमान में नक्सल संगठन का सबसे टॉप लीडर यही है। छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों की पुलिस इसकी तलाश में जुटी हुई है। इसपर सिर्फ छत्तीसगढ़ में ही 1 करोड़ रुपए का इनाम घोषित है।

2. मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपति (74)-

गणपति भी तेलंगाना का रहने वाला है। बसवाराजू से पहले ये ही नक्सल संगठन का महासचिव था। हालांकि, बीमारी और बढ़ती उम्र के चलते इसने करीब 4-5 साल पहले ही संगठन के इस सबसे बड़े पद को छोड़ दिया था। जिसके बाद बसवाराजू को इसकी जिम्मेदारी दी गई थी। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है।

3. मिशिर बेसरा उर्फ भास्कर (62)-

भास्कर झारखंड का रहने वाला है। वर्तमान में नक्सलियों का पोलित ब्यूरो मेंबर है। साथ ही ERB का इंचार्ज है। इसपर भी 1 करोड़ रुपए से ज्यादा का इनाम घोषित है।

4. पापा राव उर्फ मंगू (56)-

पापाराव छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का रहने वाला है। वर्तमान में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DKSZCM) मेंबर है। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य है।

पापाराव अपने पास AK-47 राइफल रखता है। बस्तर के जल-जंगल जमीन से वाकिफ है, इसलिए कई बार पुलिस की गोलियों से बचकर निकला है। इसी इसने सरेंडर कर दिया या फिर एनकाउंटर में मारा गया तो नक्सलियों की पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी खत्म हो जाएगी।

5. देवा बारसे उर्फ सुक्का (48)-

देवा सुकमा जिले का पूवर्ती का रहने वाला है। वर्तमान में SZCM कैडर का है। साथ ही नक्सलियों की सबसे खतरनाक टीम बटालियन नंबर 1 प्रभारी है। ये माड़वी हिड़मा का सबसे करीबी साथी रहा है। पुलिस को इसकी तलाश है। अगर पापा राव और देवा दोनों पकड़े या मारे जाते हैं तो दक्षिण बस्तर का इलाका भी शांत हो जाएगा।

IG बोले- निर्णायक साल रहा

बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा कि साल 2025 बस्तर पुलिस के लिए नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन में काफी निर्णायक साल रहा है। नक्सलियों के गढ़ में घुसकर बड़े लीडरों को मुठभेड़ में ढेर किया गया है। मारे गए माओवादियों के पास से LMG, AK-47, इंसास, SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद किया गया है।

2 सालों में ऐसे बदल गई परिस्थितियां?

2023 तक बस्तर में नक्सली फोर्स पर हावी थे। कई बड़े हमले किए गए। जवानों की कैजुअल्टी ज्यादा होती थी। लेकिन डेढ़ साल पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह छत्तीसगढ़ के दौरे के दौरान नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन जारी की थी। उन्होंने कहा था कि 31 मार्च 2026 तक देशभर से नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा।

साथ ही छत्तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के पुलिस अधिकारियों की बैठक ली। नई स्ट्रेटजी के तहत काम किया। नक्सल ऑपरेशन पर एक-दूसरे राज्य के साथ कॉर्डिनेशन स्थापित करने निर्देश दिए थे। वहीं राज्य में भी पड़ोसी जिलों की पुलिस फोर्स का संयुक्त ऑपरेशन लॉन्च किया गया।

नक्सलियों के गढ़ में घुसकर जवान नक्सलियों को घेरकर मारने लगे। यही वजह थी कि नक्सलियों को ज्यादा नुकसान हुआ है। हर 5 से 10 किमी के दायरे में कैंप खोले गए। सड़कें बनीं, इंद्रावती नदी पर पुल बनने से इसका सीधा फायदा पहुंचा और मानसून में भी जवानों का ऑपरेशन जारी रहा।