नई दिल्ली
किसी को 'मियां-तियां' या 'पाकिस्तानी' कहना गलत और आपत्तिजनक हो सकता है, लेकिन यह अपराध नहीं माना जा सकता। ऐसा कहे जाने पर धार्मिक भावनाएं आहत किए जाने के मामले में भी केस दर्ज नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह अहम फैसला दिया है। अदालत ने यह बात 80 साल के एक शख्स के खिलाफ दर्ज केस को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। बुजुर्ग पर आरोप था कि उन्होंने एक व्यक्ति को मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा था। इससे उसकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई थीं और इसी मामले में उनके खिलाफ केस दर्ज किया गया था। लेकिन उस केस को जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बेंच ने खारिज कर दिया।
बेंच ने कहा, 'बुजुर्ग पर आरोप है कि उन्होंने मियां-तियां और पाकिस्तानी कहकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया है। निसंदेह उनकी टिप्पणी खराब है और गलत तरीके से की गई। लेकिन इससे उस व्यक्ति की धार्मिक भावनाएं आहत नहीं होतीं, जिससे यह बात कही गई।' यह मामला झारखंड के बोकारो का है, जहां के एक उर्दू अनुवादक मोहम्मद शमीमुद्दीन ने आरोप लगाया था कि बुजुर्ग ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। उन्हें मियां-तियां और पाकिस्तानी कहा। शमीमुद्दीन ने 80 साल के हरि नारायण सिंह पर यह आरोप लगाते हुए कहा था कि उनकी बातों से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
इस शिकायत के आधार पर बुजुर्ग के खिलाफ सेक्शन 298 (धार्मिक भावनाएं आहत करना), सेक्शन 504 (जानबूझकर किसी को अपमानित करना और शांति भंग), 506 (आपराधिक साजिश), 353 (सरकारी कर्मचारी से बदसलूकी) जैसी धाराओं में केस दर्ज हो गया। बुजुर्ग के खिलाफ जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की। जुलाई 2021 में मजिस्ट्रेट ने इस मामले का संज्ञान लिया और बुजुर्ग को समन जारी किया।
इसके बाद बुजुर्ग ने अडिशनल सेशन जज का रुख किया, लेकिन राहत नहीं मिली। फिर उन्होंने हाई कोर्ट में अपील दायर की। वहां से भी राहत न मिलने के बाद वह सुप्रीम कोर्ट पहुंचे। शीर्ष अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद बुजुर्ग को राहत दी है। कोर्ट ने साफ किया कि उनकी टिप्पणी गलत तो है, लेकिन आपराधिक केस नहीं बना सकते। यह मामला अब ऐसे अन्य केसों के लिए भी नजीर बन सकता है।

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