अगरतला
त्रिपुरा हाई कोर्ट ने एक अवमानना मामले में सख्त रुख अपनाते हुए एक महिला को आदेश दिया कि वह पूरे दिन कोर्ट उठने तक अदालत कक्ष में खड़ी रहे। यह मामला वैवाहिक विवाद और तलाक समझौते की शर्तों का पालन न करने से जुड़ा है। महिला पर हाई कोर्ट के जज पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने और आरोप लगाने के आरोप हैं। जस्टिस टी अमरनाथ गौड़ और जस्टिस बिस्वजीत पालित की डिवीजन बेंच एक महिला के खिलाफ तलाक समझौते की शर्तों का पालन न करने और आदेश देने वाले जजों पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने के लिए अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
हाई कोर्ट ने 11 दिसंबर 2025 को दिए गए आदेश में महिला के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा, “यदि कोई पक्षकार किसी आदेश से असंतुष्ट है, तो उसके लिए कानूनी उपाय उपलब्ध हैं। मीडिया में जाकर बयान देना या प्रेस विज्ञप्ति जारी करना कोई स्वीकार्य उपाय नहीं है।” अदालत ने महिला को सजा सुनाते हुए कहा, “दंड के तौर पर यह अदालत निर्देश देती है कि कोर्ट उठने तक अदालत में खड़ी रहें। महिला होने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए और नरमी बरतते हुए यही सजा दी जा रही है।”
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 2023 के एक तलाक समझौते से जुड़ा है। उस समझौते के तहत पत्नी ने कोर्ट को आश्वासन दिया था कि वह अपनी दो बेटियों के नाम कुछ संपत्तियां गिफ्ट डीड के जरिए ट्रांसफर करेगी। इसके बदले में, पति ने उसके लिए एक नया फ्लैट खरीदने और बढ़ा हुआ मासिक भरण-पोषण भत्ता देने पर सहमति व्यक्त की थी। आरोप है कि पत्नी तलाक के फैसले की शर्तों का पालन करने में विफल रही और उसने संपत्ति ट्रांसफर नहीं किया।
महिला ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स भी की थी
शर्तों का पालन न करने पर पति ने अपनी पत्नी के खिलाफ कोर्ट के सामने दिए गए वचन का जानबूझकर उल्लंघन करने के लिए अवमानना की कार्यवाही शुरू की। याचिकाकर्ता पति के वकील ने तर्क दिया कि 2025 में पत्नी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें इस हाई कोर्ट के दो जजों पर बेबुनियाद आरोप लगाए, जो पहले इस मामले को देख रहे थे, जिसे विभिन्न समाचार चैनलों पर प्रसारित किया गया था। महिला ने अपने हस्ताक्षर से एक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करवाई थी।
उन्होंने आगे तर्क दिया कि वह डीड, जिसे पत्नी के नाम पर निष्पादित किया जाना था, निष्पादित नहीं किया जा सका क्योंकि वह उस समय मौजूद नहीं थी। पत्नी की ओर से पेश वकील ने कहा कि उनकी क्लाइंट अपने बर्ताव के लिए पछता रही है और कोर्ट से बिना शर्त माफ़ी मांगती है, और वह याचिकाकर्ता के साथ मिलकर संबंधित प्रमोटरों से याचिकाकर्ता द्वारा अपने नाम पर एक फ्लैट खरीदने के एग्रीमेंट को पूरा करने में सहयोग करने के लिए सहमत है।
अदालत का फैसला
रिपोर्ट के मुताबिक, रिकॉर्ड्स का हवाला देते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि यह साफ है कि अवमानना करने वाली महिला ने ऐसे बयान दिए थे जिनमें आरोप लगाया गया था कि तत्कालीन जस्टिस अरिंदम लोध अपने न्यायिक कर्तव्यों को ठीक से नहीं निभा रहे थे, पक्षपात कर रहे थे और गलत इरादे से पक्षपातपूर्ण फैसले सुनाए थे, जिससे न्याय की भावना को नुकसान पहुंचा। कोर्ट ने महिला को आरोपों का दोषी पाया और अवमानना करने वाली महिला को सजा देने का फैसला किया और उसे अदालत में खड़े रहने की सजा सुनाई।

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