जगदलपुर.
कहते हैं आज के समय में बेटे अपने पिता के बताए गए संस्कारों को जल्द ही भूल जाते है, साथ ही उनकी इच्छाओं पर भी ध्यान नही देते है, लेकिन कुछ ऐसे भी बेटे होते हैं जो पिता के जाने के बाद भी उनके बताए संस्कारों को भली भांति याद रखने के साथ ही उसे पूरा करके ही रहते है। जगदलपुर शहर के वृंदावन कॉलोनी में रहने वाले सेवानिवृत्त शिक्षक के बेटे ने अपने पिता के निधन के बाद उनके शव को मेकाज में अध्ययनरत छात्रों के शिक्षा के काम आ सके इसलिए उसे डोनेट कर दिया।
मृतक शिक्षक के बेटे सुरेश प्रजापति ने अपने पिता के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पिता गुरुदयाल प्रजापति पिता स्व. रामचरण 85 वर्ष मूलघर यूपी था, वर्ष 1960 में उनकी शिक्षक के तौर पर नौकरी लगने पर बस्तर आये थे, जहां से वर्ष 2002 तक ग्रामीण क्षेत्र के ग्राम करितगांव में शिक्षक के तौर पर कार्य किया। वर्ष 2002 में सेवानिवृत्त होने के बाद घर में अक्सर अपनी पत्नी को मेकाज में पढ़ने वाले बच्चों के बारे में चर्चा करने के साथ ही पढ़ाई करने के लिए उन्हें अपने शव को डोनेट करने की बात कहते। 85 वर्ष की उम्र में उन्होंने अपनी अंतिम सांस ली, जिसके बाद उनके पार्थिव देह को सोमवार की शाम को मेकाज के डॉक्टरों को परिजनों के द्वारा सौपा गया।
वर्ष 2022 में भरा था आवेदन फार्म
बेटे सुरेश ने बताया कि पिता के द्वारा 29 अगस्त 2022 को मेकाज आने के बाद यहां के डॉक्टरों से चर्चा किया, जिसके बाद अपने शव को मेकाज में लगातार आने वाले बच्चों के शिक्षा में शरीर काम आ सके, इसके लिए अपने शरीर को दान करने की बात अपनी धर्मपत्नी को बताया जिसपर उन्होंने भी उनके इस फैसले का साथ देते हुए हां कर दिया।
क्यों जगी शव डोनेट करने की इच्छा
परिजनों ने बताया कि मृतक शिक्षक गुरुदयाल प्रजापति के दो बेटों में से बड़े बेटे महेश प्रजापति आज से डेढ़ साल पहले एक सड़क दुर्घटना में उनका निधन हो गया था, जिसके बाद से बेटे के जाने से उन्हें काफी बुरा लगा और फिर अपने शव को डोनेट करने का फैसला कर लिया।

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