देश में आय का 40% तक स्मार्टफोन पर खर्च, महंगाई ने 22 करोड़ यूजर्स का अपग्रेड अटकाया

नई दिल्ली

देश में 22 करोड़ लोग फीचर फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। वे स्मार्टफोन पर शिफ्ट होना चाहते हैं। पर बजट और महंगे हैंडसेट बड़ी बाधा हैं। एक भरोसेमंद स्मार्टफोन और एंट्री-लेवल फीचर फोन के बीच ₹4-6 हजार का अंतर है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक मेमोरी चिप की कीमतें बढ़ने से अंतर 6-8 हजार हो सकता है। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के मुताबिक महंगे स्मार्टफोन डिजिटल इंडिया के लिए चुनौती हैं। बेसिक स्मार्टफोन की कीमत यूजर की मासिक आय का 30-40% तक है।

यह सामर्थ्य के तय मानक 5% से कई गुना है। सिंधिया ने सुझाव दिया है कि पीएलआई स्कीम को मेक इन इंडिया से आगे बढ़ाकर ‘अफोर्डेबल इन इंडिया’ की दिशा में ले जाना चाहिए।

हिस्सेदारी

    5-10 हजार सेगमेंट: बाजार हिस्सेदारी 24% है और इसमें 71% मॉडल अब 5जी तकनीक वाले हैं।

    15 हजार से कम सेगमेंट: इसकी कुल मार्केट हिस्सेदारी 4% रह गई है और इसमें 100% मॉडल 4जी हैं।

फीचर फोन से 7 गुना महंगा स्मार्टफोन
देश का सबसे सस्ता 4जी स्मार्टफोन आईटेल जेनो ₹5799 रुपए का है। वहीं लावा शार्क ₹8999 रुपए में सबसे सस्ता 5जी स्मार्टफोन विकल्प है। इसके मुकाबले स्नेक्सलैन गुरु 301 जैसा 2जी फीचर फोन महज ₹649 और कार्बन के1 जैसा 4जी फीचर फोन मात्र ₹835 रुपए में उपलब्ध है।

मेमोरी चिप महंगी होने से बढ़ेंगी कीमतें
काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक के मुताबिक 4जी फीचर फोन से 4जी स्मार्टफोन पर अपग्रेड के लिए ₹4 हजार अतिरिक्त खर्च करने पड़ते हैं। यदि ग्राहक 5जी फोन चुनता है तो बोझ 6 हजार रुपए तक बढ़ जाता है। मेमोरी शॉर्टेज से कीमतें बढ़ने पर स्मार्टफोन खरीदना और मुश्किल होगा।

मेमोरी चिप की कीमतों में उछाल: ₹8,000 तक बढ़ सकती है लागत 
इंडस्ट्री के अनुमानों के मुताबिक, साल 2026 तक स्मार्टफोन की कीमतों में भारी उछाल आने की उम्मीद है। इसका मुख्य कारण मेमोरी चिप की वैश्विक किल्लत और कीमतों में हो रही वृद्धि है। माना जा रहा है कि केवल मेमोरी की बढ़ती लागत के कारण हर हैंडसेट की कीमत में ₹6,000 से ₹8,000 तक का इजाफा हो सकता है। 

काउंटरपॉइंट रिसर्च के डायरेक्टर तरुण पाठक के अनुसार: 
"वर्तमान में 4G फीचर फोन से स्मार्टफोन पर शिफ्ट होने का मतलब ₹4,000 का अतिरिक्त बोझ है, जो 5G के मामले में ₹6,000 तक है। 2026 में यह गैप और बढ़ेगा। सरकार को किफायती फोन निर्माताओं को इंसेंटिव देने पर विचार करना चाहिए।" 

आय का 40% हिस्सा स्मार्टफोन पर: सिंधिया ने जताई चिंता 
संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इस मुद्दे को डिजिटल समावेशन की 'नई सीमा' करार दिया है। उन्होंने तर्क दिया कि कई बाजारों में एक बेसिक स्मार्टफोन की कीमत यूजर की मासिक आय के 30-40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि वैश्विक मानक के अनुसार यह 5 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। सिंधिया ने सुझाव दिया है कि अब समय आ गया है जब PLI (प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव) योजना का ध्यान "मेक इन इंडिया" के साथ-साथ "अफोर्डेबल इन इंडिया" पर भी केंद्रित हो। 

बाजार का बदलता स्वरूप और चुनौतियां
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय
(MeitY) फिलहाल स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने और वैल्यू एडिशन पर ध्यान दे रहा है, लेकिन घरेलू बाजार में ₹5,000-10,000 की कैटेगरी छोटी होती जा रही है। 

बाजार के प्रमुख आंकड़े (2025-26 अनुमान): 
₹5,000 से कम का सेगमेंट: कुल शिपमेंट में केवल 4% योगदान (सभी 4G फोन)। 

₹5,000-10,000 का सेगमेंट: 24% योगदान (71% 5G फोन)। 

मुनाफे की कमी: OEMs (कंपनियों) के लिए इस कम बजट वाले सेगमेंट में मुनाफा कमाना चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है।