भोपाल
मारपीट, दुर्घटना, एसिड अटैक या किसी भी कारण से होने वाले चोट के मामलों में अब फोटो अनिवार्य साक्ष्य होंगे। पुलिस और मेडिको–लीगल केस (एमएलसी) बनाने वाले डॉक्टर को घायल की चोटों के फोटो लेना जरूरी कर दिया गया है। इन फोटो को न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से पुख्ता प्रमाण के तौर पर प्रस्तुत किया जा सकेगा।
पुलिस मुख्यालय ने इस संबंध में भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्त, सभी जिलों, रेल और अजाक के पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। साथ ही, स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से सभी सीएमएचओ को पत्र भेजा जाएगा ताकि एमएलसी तैयार करने वाले डॉक्टर इस नियम का पालन करें।
अभी तक फोटो नहीं लेते थे
अब तक डॉक्टर अपनी रिपोर्ट में केवल घाव की लंबाई और गहराई लिखते थे, लेकिन फोटो नहीं लेते थे। इस व्यवस्था की आवश्यकता तब महसूस हुई जब झाबुआ जिले के मारपीट मामले में जुलाई 2025 में हाई कोर्ट इंदौर खंडपीठ ने चोट के फोटो न होने पर आपत्ति जताई थी।
उस मामले में न तो घायलों को अस्पताल ले जाने वाले पुलिसकर्मी ने फोटो लिए थे और न ही डॉक्टर ने। इसके बाद पुलिस मुख्यालय की सीआईडी शाखा ने आदेश जारी कर दिया कि हर चोट के फोटो सुरक्षित रखे जाएं ताकि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें कोर्ट में प्रस्तुत किया जा सके।

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