नई दिल्ली
'भारत सहिष्णु है, कमजोर नहीं. हम जोखिम भी ले सकते हैं और घर में घुसकर करारा प्रहार भी कर सकते हैं. हमारी सहनशीलता को कमजोरी समझने की गलती न करें.' राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने ये बातें डिस्कवरी की आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज में कही हैं।
ऑपरेशन सिंदूर पर यह डोभाल का पहला इंटरव्यू बताया जा रहा है. इसमें उन्होंने 88 घंटे चले सैन्य अभियान के पीछे की रणनीति और निर्णय प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बात की. डोभाल ने कहा कि ऑपरेशन का मकसद दुश्मन के उन ठिकानों को नष्ट करना था, जो विशेष रूप से पहलगाम आतंकी हमले के लिए जिम्मेदार थे।
'Declassified: Operation Sindoor' दो पार्ट वाली डॉक्यूमेंट्री सीरीज है. इसका प्रसारण शनिवार रात 9 बजे डिस्कवरी चैनल और उसकी स्ट्रीमिंग सेवा discovery+ पर किया जाएगा. इसमें ऑपरेशन सिंदूर से जुड़े घटनाक्रम और भारत के शीर्ष सैन्य एवं सुरक्षा नेतृत्व के फैसलों को प्रत्यक्ष विवरणों के साथ पेश किया जाएगा।
डोभाल ने भारत की नीति और सैन्य क्षमता को लेकर भी स्पष्ट संदेश दिया. उन्होंने कहा, 'दुनिया के लिए संदेश बहुत स्पष्ट है- भारत की उदारता या भारत के सहनशील होने को उसकी कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए. भारत जोखिम ले सकता है, भारत करारा प्रहार कर सकता है, परिणाम चाहे जो भी हों।
डिस्कवरी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, दो भागों वाली इस डॉक्यूमेंट्री सीरीज में भारत के सैन्य और राष्ट्रीय सुरक्षा नेतृत्व को शामिल किया गया है. इसमें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लिए गए महत्वपूर्ण फैसलों और घटनाक्रम को उन अधिकारियों के प्रत्यक्ष अनुभवों के जरिए सामने रखा गया है, जिन्होंने भारत की जवाबी कार्रवाई की निगरानी की थी. डोभाल इसमें सैन्य कार्रवाई के पीछे की निर्णय प्रक्रिया, रणनीति और दृढ़ संकल्प पर अपना पक्ष रखते नजर आएंगे।
88 घंटे चला था सैन्य अभियान
बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर की शुरुआत पिछले साल 7 मई की सुबह हुई थी. यह कार्रवाई 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए घातक आतंकी हमले के जवाब में की गई थी. भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थित कई आतंकी ढांचों पर सटीक हमले किए थे।
इसके बाद पाकिस्तान की ओर से भी भारत के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की गई. भारत ने इसका जवाब देते हुए कई जवाबी अभियान चलाए और इन सभी कार्रवाइयों को ऑपरेशन सिंदूर के तहत अंजाम दिया गया. दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच यह सैन्य टकराव करीब 88 घंटे तक चला. 10 मई की शाम भारत और पाकिस्तान के बीच बनी सहमति के बाद सैन्य गतिविधियां थम गई थीं।

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