भोपाल
पिछले दिनों (१ अप्रेल २०२५ ) को हुई मंत्री परिषद् की बैठक में पारित एक आदेशानुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव जी ने प्रदेश में सार्वजानिक बसों को सुचारु रूप से संचालित करने एवं प्रदेश में सार्वजानिक परिवहन सेवा को सुदृढ़ बनाने के लिए " मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना को स्वीकृति दी थी। इस योजना के अंतर्गत सार्वजानिक बस सेवायें राज्य में नव गठित राज्य परिवहन उपक्रम के माध्यम से दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के अंतर्गत प्रदेश में यात्रियों की सुविधा के लिए प्रदेश के सभी मार्गों पर संगठित, सुविधजनाक, सुरक्षित यात्री परिवहन सेवा, के लिए आधुनिक तकनिकी से सुसज्जित एक राज्य स्तरीय होल्डिंग कंपनी ‘’मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड’’ (MPYPIL ) (मध्यप्रदेश शासन का उपक्रम) का गठन माननीय मुख्यमंत्रीजी की अध्यक्षता में किया गया था “लेटस क्रिएट अ लोगो” मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एन्ड इंफ्रास्ट्रक्चर (MPYPIL) के द्वारा आयोजित प्रतियोगिता है इस प्रतियोगिता में देश के कला एवं अन्य संकाय के विद्यार्थियों, फ्री लांसर कलाकारों एवं प्रोफेशनल एजेन्सियों को "लैट्स क्रिएट अ लोगो " प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
लोगो डिजाइन करने वाले रचनाकार से सर्वाधिक महत्वपूर्ण अपेक्षा संस्कृत भाषा में टैगलाइन की की जा रही है जैसे भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का आदर्श वाक्य है "योगक्षेमं वहाम्यहम्" (Yogakshemaam Vahamyaham) जिसका अर्थ है "आपका कल्याण हमारी ज़िम्मेदारी है" या "मैं आपके हित और कल्याण का वहन करता हूँ".
प्रतियोगिता की विस्तृत जानकारी को मध्यप्रदेश शासन की परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.transport.mp.gov.in में प्रकाशित किया गया है, जिसमे पुरुस्कार की राशि, नियम एवं शर्तो के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आवेदन फॉर्म इत्यादि की विस्तृत जानकारी प्रकाशित की गई है। प्रतियोगिता में सर्वश्रेष्ठ तीन प्रतीक चिन्हों (लोगो) का चयन किया जायेगा जिसमे प्रथम पुरस्कार रू. 5 लाख, द्वितीय पुरस्कार रू. 2 लाख एवं तृतीय पुरस्कार के रूप में रू. 1 लाख रूपये की की राशि दी जायेगी।
मध्यप्रदेश शासन की परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.transport.mp.gov.in में विस्तृत जानकारी के अलावा प्रतियोगीता में भाग लेने वाले आवेदक अपनी रचना ईमेल आईडी admin.mpypil@mp.gov. पर दिनांक ३० जनवरी २०२६ ,शाम पांच बजे तक भेज सकते है। प्रतियोगिता की दिनांक में किसी भी संशोधन की सूचना भी परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट www.transport.mp.gov.in में प्रकशित की जाएगी।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240