इंदौर
मध्य प्रदेश की व्यापारिक नगरी इंदौर में मंगलवार को शराब कारोबारी और पब संचालक भूपेंद्र रघुवंशी ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। साथ ही मामले की जांच में जुट गई है। बताया जा रहा है कि अन्नपूर्णा थाना क्षेत्र की भवानी काॅलोनी में रहने वाले भूपेंद्र रघुवंशी नामक युवक ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या कर ली।
एसीपी शिवेंद्र जोशी ने बताया है कि पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट मिला है, जो पांच पन्नों का है। इसमें जिन बातों का जिक्र है, पुलिस उनकी जांच कर रही है। भूपेंद्र पब और क्लब चलाते थे। पुलिस को जो सुसाइड नोट मिला है, उसमें पैसों की मांग और किसी प्रकरण में फंसाए जाने की बात सामने आ रही है। पुलिस सुसाइड नोट में दर्ज बातों की जांच कर रही है। इसमें एक महिला का भी जिक्र किया गया है, लेकिन पुलिस अभी उसकी जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि भूपेंद्र ने ब्लैकमेलिंग और मानसिक तनाव से परेशान होकर यह कदम उठाया है। पांच पन्नों के सुसाइड नोट में मृतक ने आत्महत्या के पीछे के कारणों का विस्तार से उल्लेख किया है। सुसाइड नोट में एक महिला सहित कई अन्य लोगों पर उसे लगातार परेशान और ब्लैकमेल करने का आरोप लगाया गया है।
मृतक ने अपने नोट में यह भी लिखा है कि वह इन परिस्थितियों से तंग आ चुका था और अब संघर्ष करने की स्थिति में नहीं है। पुलिस ने शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस के अनुसार, सुसाइड नोट के आधार पर संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ की जाएगी और यदि आवश्यक हुआ तो संबंधितों के खिलाफ भी प्रकरण दर्ज किए जाएंगे। भूपेंद्र की आत्महत्या से परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है। परिजनों का आरोप है कि मृतक को लंबे समय से कुछ लोग ब्लैकमेल और मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे। उसी से तंग आकर भूपेंद्र ने यह कदम उठाया है।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240