कनाडा
कनाडा के ब्रिटिश कोलंबिया प्रांत के सर्रे शहर में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां स्थित गुरु नानक सिख गुरुद्वारा और प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन SFJ (सिख्स फॉर जस्टिस) ने कथित तौर पर 'खालिस्तान की एंबेसी' (Khalistan Embassy) खोल दी है। यह दफ्तर गुरुद्वारे के प्रांगण में बने सामुदायिक केंद्र (community center) में स्थापित किया गया है।बताया जा रहा है कि इस कथित एंबेसी के लिए कनाडा और अमेरिका से चंदा जुटाया गया था। ये वही नेटवर्क हैं जो कई सालों से विदेशों में बैठकर खालिस्तान आंदोलन को हवा दे रहे हैं।
भारतीय समुदाय और विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की
यह वही इमारत है जिसे ब्रिटिश कोलंबिया सरकार की ओर से सरकारी फंडिंग मिली थी। हाल ही में सरकार ने इस इमारत में लिफ्ट लगाने के लिए $1,50,000 (करीब 90 लाख रुपए) की सहायता राशि दी थी। इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय नागरिकों, भारतीय समुदाय और विशेषज्ञों ने कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि सरकारी फंड का इस्तेमाल देश विरोधी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है। यह न केवल कनाडा की राष्ट्रीय एकता के खिलाफ है बल्कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद को भी बढ़ावा देता है। खालिस्तानी विचारधारा समाज में नफरत और विभाजन फैलाने का काम कर रही है।
अतीत से जुड़ी मिसाल
यह कोई पहली बार नहीं है जब खालिस्तानी समूह ने इस तरह की गतिविधि की हो। 1980 के दशक में जगजीत सिंह चौहान , जो खुद को ‘खालिस्तान का राष्ट्रपति’ बताते थे, ने इक्वाडोर में भी 'खालिस्तान एंबेसी' खोली थी। बाद में वह भारत लौट आए और शांतिपूर्वक जीवन बिताया।
सरकार की चुप्पी पर सवाल
ब्रिटिश कोलंबिया सरकार और कनाडा सरकार ने इस गतिविधि को क्यों नहीं रोका?
क्या सरकारी फंड का दुरुपयोग नहीं हुआ?
क्या इससे समाज में नफरत फैलाने वाली ताकतों को बल नहीं मिलेगा?

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