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पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक- केंद्रीय सचिव कुमार
मध्यप्रदेश का लक्ष्य सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी.
मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन पर हुआ पैनल डिस्कशन
वन्यजीव पर्यटन के संरक्षण के साथ समुदायों की समृद्धि पर जोर
भोपाल
मध्यप्रदेश की पर्यटन संभावनाओं को वैश्विक मंच प्रदान करने के उद्देश्य से आयोजित मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 के दूसरे दिन कुशाभाऊ ठाकरे अंतर्राष्ट्रीय कन्वेंशन सेंटर में 'भारत के वन्य क्षेत्रों का जीवंत परिदृश्य : मध्यप्रदेश में वन्यजीव, समुदाय और सतत पर्यटन' विषय पर पैनल चर्चा हुई। सत्र में केंद्रीय सचिव पर्यटन भुवनेश कुमार ने अपने विचार रखें। पैनल में सीईओ मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड एल. कृष्णमूर्ति, सचिव पर्यटन एवं प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश टूरिज्म बोर्ड डॉ. इलैयाराजा टी., महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू, निदेशक, एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर, संस्थापक एवं सीईओ, ग्राम स्टे पारीक्षित सिंह और वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर शिवांग मेहता शामिल रहे। सत्र का संचालन वैक्सपोल होटल्स एंड रिसॉर्ट्स की संस्थापक एवं निदेशक तथा एटोआई वुमन्स कलेक्टिव की चेयरपर्सन सुआकांक्षा गर्ग ने किया।
वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदाय के साथ जुड़ाव जरूरी- केंद्रीय सचिव कुमार
केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन में स्थानीय समुदायों के साथ जुड़ाव बेहद महत्वपूर्ण है। "स्थानीय समुदाय के साथ चलें और उनसे जुड़ें" की भावना के साथ ही सतत पर्यटन का उद्देश्य पूरा हो सकता है। मध्यप्रदेश में वन प्रबंधन और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य हुआ है, और कूनो में हुआ चीता संरक्षण इसका महत्वपूर्ण उदाहरण है। वन्यजीव पर्यटन को केवल वन्यजीव देखने तक सीमित न रखकर विविध प्राकृतिक अनुभवों से जोड़ने की आवश्यकता है। चंबल में डॉल्फिन, गांधीसागर क्षेत्र की जैव विविधता, गिद्ध संरक्षण तथा गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की रात नौका विहार जैसे अनूठे अनुभव मध्यप्रदेश के वन्यजीव पर्यटन को नया आयाम दे सकते हैं।
केंद्रीय सचिव कुमार ने कहा कि पर्यटन की सफलता केवल पर्यटकों की संख्या से तय नहीं होनी चाहिए, बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि पर्यटन से स्थानीय समुदाय और प्रकृति को कितना लाभ मिल रहा है। पर्यटकों को संवेदनशील और जिम्मेदार बनाने के लिए उन्हें पर्यटन और पर्यावरण के प्रति जागरूक करना आवश्यक है। साथ ही स्थानीय समुदायों को पर्यटकों के साथ बेहतर संवाद और आतिथ्य के लिए प्रशिक्षित किया जाए, ताकि पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय स्तर तक पहुंच सके।
पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी है महत्वपूर्ण- एल. कृष्णमूर्ति
मध्यप्रदेश ईको-टूरिज्म विकास बोर्ड के सीईओ एल. कृष्णमूर्ति ने कहा कि आने वाले समय में पर्यटन तकनीक और बेहतर संवाद के साथ आगे बढ़ेगा। वन्यजीव पर्यटन केवल भ्रमण तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यटक विशिष्ट और यादगार अनुभव के लिए आते हैं। मध्यप्रदेश में कान्हा के साथ रातापानी, सतपुड़ा, संजय और वीरांगना दुर्गावती बाघ अभयारण्य जैसे क्षेत्रों को भी वन्यजीव पर्यटन के लिए विकसित किया जा रहा है। उन्होंने पर्यटकों की सुरक्षा के साथ गाइड एवं वाहन चालकों के प्रशिक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को पर्यटन विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया।
मध्यप्रदेश का लक्ष्य 'सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल' विकसित करना- प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी.
सचिव पर्यटन एवं मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी. ने कहा कि मध्यप्रदेश ने वन एवं वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में प्रभावी कार्य किया है। हाल ही में भारत में जन्मी चीता ने पांच शावकों को जन्म दिया है, जो देश में चीता संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। चीतों को मध्यप्रदेश के पर्यावरण में ढलने में समय लगा, लेकिन अब संरक्षण के प्रयास सफल होते दिख रहे हैं। इन संरक्षण प्रयासों को पर्यटन के नए और जिम्मेदार अनुभवों से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। रातापानी को नए बाघ अभयारण्य के रूप में विकसित किया जाना प्रदेश में वन्यजीव पर्यटन के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। चंबल में गिद्धों के प्रजनन स्थलों के आसपास पूर्णिमा की चांदनी में नौका विहार जैसे विशिष्ट अनुभव पर्यटकों को प्रकृति और वन्यजीवों के करीब लाने के साथ संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश का लक्ष्य ऐसा सतत एवं संरक्षण आधारित पर्यटन मॉडल विकसित करना है, जिसमें प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता हो और स्थानीय समुदायों को रोजगार एवं आजीविका के अवसर मिलें।
वन्यजीव पर्यटन में विविध अनुभव और प्रशिक्षित गाइड जरूरी
निदेशक एंड बियॉन्ड एशिया टोबी सिंक्लेयर ने कहा कि वन्यजीव पर्यटन अब केवल बाघ देखने तक सीमित नहीं रहा। जंगल, प्रकृति, पक्षी, अन्य वन्यजीव और स्थानीय जीवन के अनुभवों को भी पर्यटन का हिस्सा बनाना होगा। इसके लिए प्रशिक्षित कहानीकारों की आवश्यकता है, ताकि पर्यटक किसी स्थान को केवल देखें नहीं, बल्कि उसे समझें और महसूस भी करें।
महाप्रबंधक, सीजीएच अर्थ एक्सपीरियंस होटल्स डेविड राजू ने कहा कि छोटे-छोटे अनुभव ही किसी गंतव्य को खास बनाते हैं। सफारी और वाहन के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ गाइडों के ज्ञान और प्रशिक्षण पर ध्यान देना जरूरी है। प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को जंगल, वन्यजीव और स्थानीय पारिस्थितिकी की बेहतर जानकारी देकर उनका अनुभव अधिक ज्ञानवर्धक और यादगार बना सकते हैं।
पैनल चर्चा में संरक्षण आधारित और समुदाय-केंद्रित वन्यजीव पर्यटन पर जोर दिया गया। साथ ही कहा गया कि कान्हा, बांधवगढ़, पेंच, सतपुड़ा, पन्ना और माधव सहित प्रदेश के वन क्षेत्रों में पर्यटन की व्यापक संभावनाएं हैं। पर्यटन का विकास पर्यटकों की संख्या बढ़ाने से ज्यादा प्रकृति संरक्षण और स्थानीय समुदायों की भागीदारी को प्राथमिकता देकर किया जाना चाहिए। स्थानीय रोजगार, प्रशिक्षित गाइड, होमस्टे, स्थानीय व्यंजन, हस्तशिल्प और सांस्कृतिक अनुभवों को बढ़ावा देकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जा सकता है।

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