क्या आप भी जॉब पोर्टल खोलते हैं और घंटों तक केवल अप्लाई बटन पर क्लिक करते रहते हैं, फिर भी आपका इनबॉक्स खाली रहता है. अगर ये हालात आपको जानी-पहचानी लग रही है तो आप अकेले नहीं हैं. आजकल जॉब ढूंढने वाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है और वे इस आदत का शिकार हो रहे हैं जिसे डूमजॉबिंग कहा जाता है. ये आदत बाहर से अच्छी और काम की लगती है लेकिन अक्सर इसका कोई खास फायदा नहीं होता है.
यह डूमस्क्रॉलिंग से जुड़ा एक तरीका है, जिसमें लोग बिना किसी सही प्लानिंग के कई सारे जॉब्स पर अप्लाई करते हैं. वे ज्यादा अप्लाई को ही ऑफर मान लेते हैं. लेकिन एक्पर्ट्स बताते हैं कि यह तरीका करियर को आगे बढ़ाने के बजाय आपको नुकसान भी पहुंचा सकता है.
क्या है डूमजॉबिंग?
डूमजॉबिंग एक ऐसा ट्रेंड है जिसमें नौकरी तलाशने की प्रोसेस सोच-समझकर नहीं बल्कि चिंता और जल्दबाजी में की जाती है. इसमें कैंडिडेट किसी प्लानिंग के बिना हर जॉब पर अप्लाई कर देते हैं, जो उन्हें थोड़ी-बहुत भी आकर्षक लगती है. जॉब मार्केट में छंटनी और बढ़ते कॉम्पिटिशन के चलते ये ट्रेंड तेजी से बढ़ा है. कई युवाओं का मानना है कि जितनी ज्यादा नौकरियों के लिए अप्लाई किया जाएगा, उतने ही मौके बढ़ेंगे, लेकिन अक्सर यह जितना अधिक, उतना बेहतर वाली सोच उल्टा असर डालती है. एक्सपर्ट्स कहते हैं कि इसकी शुरुआत एक लक्ष्य के साथ होती है लेकिन धीरे-धीरे बिना किसी साफ दिशा के लगातार स्क्रॉल करने और हर नौकरी पर आवेदन करने में बदल जाती है.
जब भी कोई कैंडिडेट अप्लाई पर क्लिक करते हैं तो उन्हें लगता है कि नौकरी तो बस उनके हाथ में ही है, लेकिन ऐसा नहीं होता है. जब कोई उम्मीदवार बिना रिज्यूमे तैयार किए या पोस्ट के बारे में जाने बिना बड़ी संख्या में अप्लाई करते हैं तो, सिलेक्ट होने की संभावना कम हो जाती है. रिक्रूटर सिंपल और बिना तैयारी वाले आवेदनों को आसानी से पहचान लेते हैं, और उन्हें बिना देखे रिजेक्ट कर देते हैं.
क्यों नहीं आ रहा कॉल?
सच बात तो यह है कि 100 नौकरियों पर अप्लाई करने के बाद आप इसमें पास हों, इसकी कोई गारंटी नहीं होती है. इससे आपको बहुत नुकसान भी पहुंच सकता है-
आपका रिज्यूम हर पोस्ट के लिए अलग-अलग नहीं बनाया गया है.
आप शायद ऐसी नौकरियों के लिए आवेदन कर रहे हैं जो आपकी प्रोफाइल से मैच नहीं करती है.
रिसर्च और करियर स्पेशलिस्ट इस बात पर जोर देते हैं कि बड़ी संख्या में आवेदन करने की बजाय नेटवर्किंग और सही तरीके से चुने गए (टारगेटेड) ऑफर ज्यादा असरदार होते हैं.
डूमजॉबिंग का मेंटल हेल्थ पर असर
डूमजॉबिंग तनाव, डर या तुरंत नौकरी पाने की जरूरत से शुरू होती है, खासकर नौकरी छूटने के बाद. समय के साथ यह थकान, सेल्फ डाउट और चिंता को बढ़ा देती है. ऐसी स्थिति में व्यक्ति को लगता है कि उसके पास कंट्रोल नहीं है और वह फंस गया है. लगातार अप्लाई करना और जवाब न मिलने की वजह से आपका दिमाग थक जाता है.
क्या अलग करना होगा?
ऐसी स्थिति से बाहर निकलने के लिए कम पोस्ट पर अप्लाई करें लेकिन अपने रिज्यूमे और कवर लेटर को सही से तैयार करें.
बिना सोचे-समझे किसी भी पोस्ट पर अप्लाई करने के बजाय उन पोस्ट पर ही अप्लाई करें, जिसमें आपकी एक्सपर्टीज हो.
केवल जॉब के लिए अप्लाई करने के बजाय अपनी नेटवर्किंग को मजबूत करें.

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