भोपाल
प्रदेश सरकार कुपोषण की समस्या से निपटने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। विभिन्न नवाचारों और प्रयासों से कुपोषण के खिलाफ पिछले 20 वर्षों में लगातार सुधार देखने को मिल रहा है। इसी क्रम में झाबुआ जिले मे कुपोषण से मुक्ति के लिये अभिनव पहल की गई है। कुपोषण मुक्त झाबुआ बनाने के लिये प्रोजेक्ट के तौर पर तीन माह में गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से ग्रसित बच्चों को सामान्य पोषण स्तर पर लाने का लक्ष्य रखा गया है।
कुपोषण मुक्ति के प्रोजेक्ट को आकर्षक और आसानी से समझने के उद्देश्य से 15 दिवस के स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के दौरान "मोटी आई" यानि (स्वस्थ बच्चे की माता) की जोड़ी बना कर जागरूक किया जा रहा है। झाबुआ मे लगभग 2 शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें गंभीर तीव्र कुपोशित 1613 बच्चों का चिन्हांकन किया गया। प्रत्येक कुपोषित बच्चे की माता के साथ "मोटी आई" की जोड़ी बनाकर कुपोषण से लडने की समझाईश और जागरूकता के लिये काउंसलिंग की जाती है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन और शिशु रोग विशेषज्ञ की अनुशंसा के अनुरूप 'विशेष लड्डू' और 'चिक्की' को प्राथमिक तौर पर फोर्थ मील के रूप में बच्चों को दिया जा रहा है। जिले मे आयुष विभाग द्वारा कुपोषित बच्चों की मालिश कराये जाने का प्रशिक्षण आंगनवाड़ी सहायिका को दिया जाता है।

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