भोपाल
मध्य प्रदेश में क्या वजह है कि आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने में रुचि दिखा रहे हैं। पिछले एक साल में 17 आईएएस अधिकारी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर गए, केवल तीन ही वापस लौटे और वर्तमान में चार प्रयासरत हैं। हाल ही में केंद्रीय कार्मिक विभाग ने एक और आईएएस अधिकारी अविनाश लवानिया की केंद्र में प्रतिनियुक्ति का आदेश जारी किया है। इसके अलावा, सचिव स्तर के चार अधिकारी स्वतंत्र कुमार सिंह, अभिषेक सिंह, श्रीमन शुक्ला और जॉन किंग्सले भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए प्रयासरत हैं। जो अधिकारी पहले ही प्रतिनियुक्ति पर केंद्र में जा चुके हैं, उनमें प्रीति मैथिल, प्रियंका दास, सोफिया वली फारुकी, तरुण पिथोड़े, अजीत कुमार, चंद्रमोहन ठाकुर, पंकज जैन, नीरज सिंह, तन्वी सुंदरियाल, प्रवीण सिंह अढ़ायच, निकुंज श्रीवास्तव, ज्ञानेश्वर पाटिल, पवन शर्मा, बक्की कार्तिकेयन, हर्ष दीक्षित और अनुराधा पी. शामिल है। राज्य में वापस लौटे तीन अधिकारी विशेष गढ़पाले, आशीष भार्गव और रूही खान हैं।
मंत्रियों और विधायकों के कामकाज की गहन समीक्षा
डॉ. मोहन यादव के मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल को 12 दिसंबर को दो वर्ष पूर्ण हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इसके बाद मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। इसी संदर्भ में संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर मंत्रिमंडल के सदस्यों की कार्य पद्धति को लेकर गहन समीक्षा चल रही है। संगठन और सत्ता के शीर्ष स्तर पर पिछले दो वर्षों में उनके विभाग का कामकाज, व्यवहार और छवि को लेकर विशेष समीक्षा की जा रही है। प्रभार के जिलों में मंत्रियों के कार्यों का क्या सकारात्मक परिणाम निकला यह भी परखा जा रहा है। इसी तरह से पार्टी के विधायकों की भी संभाग स्तर पर समीक्षा हो रही है। पार्टी के उच्च स्तर से मिली जानकारी के अनुसार इसी समीक्षा के आधार पर मंत्रिमंडल विस्तार में विधायकों को शामिल किया जाएगा और खराब परफॉर्मेंस वाले मंत्रियों को बाहर किया जाएगा।
जनसंपर्क कर्मियों की कलम बंद हड़ताल स्थगित
राज्य शासन के एक आदेश के बाद जनसंपर्क विभाग के सभी अधिकारी- कर्मचारी उसका विरोध करते हुए कलम बंद हड़ताल पर चले गए थे। आयुक्त जनसंपर्क के आश्वासन के बाद फिलहाल इसे स्थगित कर दिया गया है। दरअसल विभाग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को जनसंपर्क संचालनालय भोपाल में अपर संचालक के पद पर पदस्थ किया गया है। विभाग के अधिकारी कर्मचारियों ने इस आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने का आग्रह शासन से किया है और कहा है कि जब तक यह आदेश निरस्त नहीं हो जाता तब तक प्रदेश के सभी अधिकारी कर्मचारी कलम बंद हड़ताल पर रहेंगे। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जनसंपर्क विभाग सरकार की नीतियों को संवेदनशील और प्रभावी तरीके से जनता तक पहुंचाते हैं। यह विभाग सरकार की छवि बनाने के लिए कार्य करता है। यहां प्रशासन के बजाय कार्य की प्रकृति और संस्कृति अलग तरह की है। ऐसे में राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी गणेश जायसवाल की पदस्थापना ने कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। लेकिन आज दिन में आयुक्त जनसंपर्क से तीन सत्रों में हुई बैठक और आश्वासन के बाद जनसंपर्ककर्मियों ने फिलहाल हड़ताल को स्थगित कर दिया है।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240