जयपुर.
सैनिक क्षत्रिय माली समाज सामूहिक विवाह समिति के तत्वावधान में बुधवार को माली समाज संस्थान परिसर में पारंपरिक घृतपान रस्म के साथ पंचम सामूहिक विवाह सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। सुबह सात बजे से वर-वधू अपने परिजनों के साथ समारोह स्थल पर पहुंचने लगे।
करीब पांच बीघा में फैला माली समाज भवन परिसर वैवाहिक उल्लास और पारंपरिक सज्जा से सुसज्जित नजर आया। समिति ने प्रत्येक जोड़े को अधिकतम 15-15 परिजन साथ लाने के निर्देश जारी किए थे। जिसका व्यवस्थाओं में सकारात्मक प्रभाव नजर आया। सुबह सवा आठ बजे वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पंडित सुनील दाधीच के नेतृत्व में पहले 70 वधुओं और बाद में 70 वरों को अलग-अलग घृतपान कराया गया। करीब तीन घंटे तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में समाज की परंपरानुसार सभी वैवाहिक रस्में विधिवत संपन्न हुईं। कार्यक्रम ने सामाजिक एकता, सादगी और सामूहिकता का संदेश दिया।
परिवारजनों ने इस पल को मोबाइल में कैद किया। करीब तीन घंटे चली धार्मिक प्रक्रिया में सभी पारंपरिक रस्में विधिवत संपन्न हुईं। शंखध्वनि और मंत्रोच्चार से वातावरण आध्यात्मिक बना रहा। दोपहर बाद महिलाओं के सानिध्य में विनायक पूजन हुआ। ढोलक की थाप पर गूंजते पारंपरिक मंगल गीतों ने वातावरण में उल्लास भर दिया। सुव्यवस्थित भोजन व्यवस्था में स्वयंसेवक लगातार मार्गदर्शन करते रहे।
आज माली समाज भवन निकलेगी निकासी
फुलरिया दूज पर गुरुवार सुबह आठ बजे माली समाज भवन से 70 दूल्हों की एक साथ घोड़ी पर निकासी निकाली जाएगी। चार बैंडों की अगुवाई में करीब 2.5 किलोमीटर लंबी बारात राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय चेनार में बनाए गए विवाह स्थल पर पहुंचेगी। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर पुष्पवर्षा की जाएगी। समिति के अनुसार निकासी में करीब 10 हजार बाराती शामिल होंगे।
यज्ञ वेदी पर होंगे पाणिग्रहण संस्कार
विवाह स्थल पर यज्ञ वेदी सजाई गई है। पंडित सुनील दाधीच के मार्गदर्शन में पूर्ण विधि-विधान से पाणिग्रहण संस्कार कराएंगे। भामाशाह रामवल्लभ भाटी, बलदेवराम भाटी, समिति के अध्यक्ष कृपाराम देवड़ा, रामपाल देवड़ा, देवकिशन सोलंकी, मनीष कच्छावा, सूरजमल भाटी, कैलाश गहलोत, अर्जुनराम कच्छावा, रामचंद्र सांखला, पाबूराम सांखला आदि मौजूद रहे।
गैर-डांडिया में झूमे समाज बंधु
बुधवार को शाम सात बजे शुरू हुए गैर-डांडिया नृत्य ने माहौल में उत्सव का रंग भर दिया। नागौर, ताऊसर, चेनार, रोल, सालवा सहित विभिन्न गांवों से आए समाज बंधुओं ने पारंपरिक परिधानों में नृत्य किया। देर रात तक चले इस सांस्कृतिक आयोजन ने सामूहिक विवाह महोत्सव का उल्लास बढ़ा दिया।

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