हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी: न्यूक्लियर प्लांट और अंडरसी मेट्रो बन सकती है, तो गड्ढामुक्त सड़कें क्यों नहीं?

 जबलपुर 
हाई कोर्ट कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया व न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की युगलपीठ ने तल्ख टिप्पणी में पूछा कि जब देश में न्यूक्लियर पावर प्लांट और समुद्र के नीचे मेट्रो बनाई जा सकती है, तो ऐसी सड़कें क्यों नहीं बनाई जा सकतीं।

मौत के गड्ढों को लेकर दायर जनहित याचिका
आगे कहा कि जो वर्षों तक गड्ढामुक्त रहें। हाई कोर्ट में सड़कों के मौत के गड्ढों को लेकर दायर जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान उठे इस सवाल ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और सरकारी जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है।

अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी
कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए केंद्र और राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई पांच अगस्त को होगी। इस मामले की सुनवाई के दौरान प्रतिवादियों को जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया गया।

प्रदेश की अनेक सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं
इंदौर के कल्याण संपत गार्डन निवासी व सेवानिवृत्त ट्रेन मैनेजर राजेन्द्र सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि प्रदेश की अनेक सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं, जिससे आए दिन जानलेवा हादसे हो रहे हैं।

प्रदेश में टिकाऊ सड़कें नहीं बन पा रही हैं
जनहित याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अभिनव मल्होत्रा ने दलील दी कि आधुनिक तकनीक उपलब्ध होने के बावजूद प्रदेश में टिकाऊ सड़कें नहीं बन पा रही हैं।

पुणे की लगभग 50 वर्ष पुरानी सड़क का उदाहरण
उन्होंने पुणे की लगभग 50 वर्ष पुरानी सड़क का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि वहां सड़कें दशकों तक सुरक्षित रह सकती हैं, तो मध्य प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण सड़क निर्माण क्यों नहीं हो रहा।

जनहित याचिका में वर्ष 2023 की रिपोर्ट का हवाला
जनहित याचिका में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की वर्ष 2023 की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि वर्ष 2023 में मध्य प्रदेश में गड्ढों से संबंधित सड़क दुर्घटनाओं में पिछले वर्ष की तुलना में 31.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।