मंडला में 15 ईसाई लोगों की घर वापसी, पूजा-पाठ के बाद अपनाया हिंदू धर्म

मंडला
मध्य प्रदेश के मंडला जिले में 15 ईसाई लोगों ने घर वापसी की है। घर वापसी कार्यक्रम का आयोजन सुरंगदेवरी गांव स्थित प्रसिद्ध सिद्धेश्वर धाम में आयोजित किया गया था। सोमवार को यहां धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया है। इसके बाद तीन परिवारों के 15 सदस्यों ने सनातन धर्म अपनाया है।

धार्मिक अनुष्ठान का हुआ आयोजन
दरअसल, जिले के सुरंगदेवी गांव स्थित प्रसिद्ध सिद्धेश्वर धाम में एक धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ था। इसमें कुल 15 लोगों ने ईसाई धर्म को छोड़कर हिंदू धर्म अपनाया है। यह घर वापसी कार्यक्रम आचार्य ललित मिश्रा की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार, हवन-पूजन और परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ।

बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे
यह आयोजन आचार्य ललित मिश्रा द्वारा आयोजित गणेश पुराण कथा के समापन दिवस पर हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण और श्रद्धालु मौजूद रहे, जिन्होंने पूरे विधि-विधान के साथ इस धार्मिक प्रक्रिया को साक्षी भाव से देखा।

तीन वर्षों से कर रहे हैं धार्मिक आयोजन
आचार्य ललित मिश्रा पिछले करीब तीन वर्षों से इस क्षेत्र में धार्मिक और आध्यात्मिक आयोजन कर रहे हैं। उनके द्वारा आयोजित कथाओं और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से अब तक कई परिवारों की घर वापसी कराई जा चुकी है। आचार्य मिश्रा ने बताया कि यह प्रक्रिया पूरी तरह स्वेच्छा से की जाती है और किसी पर कोई दबाव नहीं डाला जाता।

स्वेच्छा से लौटे मूल धर्म में
घर वापसी करने वाले परिवारों के सदस्यों ने बताया कि वे कुछ वर्ष पूर्व विभिन्न व्यक्तिगत और सामाजिक कारणों से ईसाई धर्म में चले गए थे। समय के साथ उन्हें अपनी मूल परंपराओं, संस्कारों और संस्कृति से जुड़ाव महसूस हुआ, जिसके बाद उन्होंने अपनी मर्जी से सनातन धर्म में लौटने का निर्णय लिया।

संस्कृति से जोड़ना ही उद्देश्य
इस अवसर पर आचार्य ललित मिश्रा ने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करते हैं और किसी भी धर्म के प्रति द्वेष नहीं रखते। उनका उद्देश्य केवल उन लोगों को उनकी मूल संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक संस्कारों से दोबारा जोड़ना है, जो किसी कारणवश उनसे दूर हो गए थे।

ग्रामीणों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम के दौरान सुरंगदेवरी गांव सहित आसपास के क्षेत्रों के कई लोग मौजूद रहे। पूरे आयोजन के दौरान शांति और अनुशासन बना रहा। घर वापसी के बाद हवन-पूजन कर सभी के सुख-समृद्धि की कामना की गई।