रूस की घातक सबमरीन भी अपना जहाज नहीं बचा पाई, अमेरिका ने नाक के नीचे से ले लिया – पुतिन क्यों रहे खामोश?

मॉस्को 

अटलांटिक महासागर में यूएस नेवी ने रूसी झंडे वाले जहाज मार‍िनेरा (Marinera) को अपने कब्जे में ले लिया. सबको लगा था क‍ि रूस जवाब देगा. हो सकता है क‍ि अमेर‍िकी नेवी पर अटैक हो जाए, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ. डिफेंस एक्‍सपर्ट को एक बात सबसे ज्‍यादा परेशान कर रही है, वो है क‍ि रूस की घातक परमाणु पनडुब्‍बी (Nuclear Submarine) की खामोशी. इस सबमरीन को जहाज को बचाने के ल‍िए रूस ने भेजा था, फ‍िर ऐसा क्‍या आ क‍ि वह बचा नहीं पाई? उसकी नाक के नीचे से अमेर‍िका रूस का जहाज कैसे लेकर चला गया? रूसी राष्‍ट्रपत‍ि व्‍लादि‍मीर पुत‍िन खामोश क्‍यों रहे?

कहा जा रहा क‍ि रूसी नेवी की सबसे घातक सबमरीन उस वक्त उसी क्षेत्र में मौजूद थी. उसके पास हाइपरसोनिक मिसाइलें थीं, गाइडेड टॉरपीडो थे, फिर भी वह एक ‘मूकदर्शक’ बनी रही और अमेरिकी नौसेना जहाज को खींचकर ले गई. आखिर दुनिया की सबसे ताकतवर पनडुब्बियों में से एक ने अपने ही देश के जहाज को क्यों नहीं बचाया? उसने टॉरपीडो क्यों नहीं दागा? क्या यह रूस की कमजोरी थी या कोई बहुत बड़ी रणनीति?

टॉरपीडो दागना यानी थर्ड वर्ल्‍ड वॉर

सबसे बड़ा और सीधा कारण है युद्ध की शुरुआत. ड‍िफेंस एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, मार‍िनेरा एक मर्चेंट वेसल यानी कार्गो जहाज था, न कि कोई वॉरश‍िप. अंतरराष्ट्रीय कानून और सैन्य प्रोटोकॉल के मुताबिक, अगर अमेरिकी नेवी किसी जहाज को रोकती है या जब्त करती है, तो यह पुलिस एक्शन या लॉ एनफोर्समेंट माना जाता है. लेकिन, अगर रूसी सबमरीन इसके जवाब में अमेरिकी जहाज पर टॉरपीडो दाग देती, तो वह सीधे तौर पर एक्ट ऑफ वॉर होता.

पूर्व नौसेना अधिकारी और डिफेंस एनालिस्ट कहते हैं, एक कार्गो जहाज को बचाने के लिए कोई भी कमांडर परमाणु शक्ति संपन्न देशों के बीच सीधा युद्ध शुरू नहीं कर सकता. अगर सबमरीन फायर करती, तो अमेरिका इसे अपने संप्रभु जहाज पर हमला मानता और नाटो आर्टिकल 5 लागू हो जाता. रूस एक जहाज के लिए दुनिया को परमाणु युद्ध में नहीं झोंक सकता.
जैसे ही फायर करती, मारी जाती

    पनडुब्बी का सबसे बड़ा हथियार उसकी मिसाइलें नहीं, बल्कि उसकी स्‍ट‍िल्‍थ पॉवर है. वह पानी के नीचे छिपी रहती है, इसलिए खतरनाक है. जिस वक्त मार‍िनेरा को जब्त किया जा रहा था, उस वक्त अमेरिकी नेवी के पी-8 पोसाइडन (P-8 Poseidon) एयरक्राफ्ट और एंटी-सबमरीन डिस्ट्रॉयर्स वहां मौजूद थे. सबमरीन जैसे ही टॉरपीडो लॉन्च करने के लिए अपना ट्यूब खोलती या फायर करती, उसकी ध्वनि अमेरिकी सोनार पर आ जाती.

    फायरिंग करते ही सबमरीन की सटीक लोकेशन पता चल जाती. अमेरिकी जहाज और हेलीकॉप्टर तुरंत उस पर जवाबी हमला कर देते. एक मर्चेंट जहाज को बचाने के चक्कर में रूस अपनी अरबों डॉलर की अत्याधुनिक परमाणु पनडुब्बी और सैकड़ों नाविकों को खो देता. यह एक आत्मघाती कदम होता.

मार‍िनेरा की कीमत vs सबमरीन की कीमत

    म‍िल‍िट्री स्‍ट्रैटजी में कास्‍ट बेन‍िफ‍िट एनाल‍िस‍िस बहुत मायने रखता है. मार‍िनेरा एक कार्गो जहाज था. इसमें या तो तेल था, हथियार थे या कोई प्रतिबंधित सामान. इसकी कीमत कुछ मिलियन डॉलर हो सकती है. रूसी सबमरीन की कीमत लगभग 3 से 4 अरब डॉलर है. यह रूस का सबसे कीमती रणनीतिक हथियार है.

    कोई भी समझदार नौसेना कमांडर एक मामूली जहाज को बचाने के लिए अपनी सबसे कीमती स्ट्रैटेजिक एसेट को खतरे में नहीं डालेगा. सबमरीन का काम सिर्फ जहाज बचाना नहीं, बल्कि अमेरिका के मेनलैंड पर न्‍यूक्‍ल‍ियर ड‍िटोरेंट बनाए रखना है.

अमेरिका का एंटी-सबमरीन जाल

अटलांटिक महासागर में अमेरिका का दबदबा है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब अमेरिकी नेवी ने मार‍िनेरा को इंटरसेप्ट किया, तो उन्होंने पहले ही यह सुनिश्चित कर लिया होगा कि नीचे कोई रूसी सबमरीन उन्हें नुकसान न पहुंचा सके. अमेरिकी नेवी के पास साउंड सर्विलांस स‍िस्‍टम है, जो समुद्र के तल में लगे सेंसर का एक नेटवर्क है. संभावना है कि अमेरिकी नेवी को पहले से पता था कि रूसी सबमरीन कहां है. ऐसे में, अगर रूसी सबमरीन कोई भी हरकत करती, तो उसे तुरंत घेर लिया जाता. रूसी कमांडर यह जानते थे कि वे दुश्मन के घर में हैं और वे ‘घिरे हुए’ हैं.
यह कब्जा था, हमला नहीं

हमें यह समझना होगा कि अमेरिका ने जहाज को डुबोया नहीं, बल्कि जब्त किया है. अगर अमेरिका जहाज पर मिसाइल दागकर उसे डुबो रहा होता और रूसी क्रू की जान खतरे में होती, तो शायद सबमरीन कुछ आक्रामक कदम जैसे चेतावनी देना, उठा सकती थी. लेकिन यहां अमेरिका ने बोर्डिंग टीम भेजी और जहाज को अपने कंट्रोल में ले लिया. ऐसे में सबमरीन के पास करने के लिए कुछ नहीं था. वह पानी के नीचे से लाउडस्पीकर पर चेतावनी नहीं दे सकती और न ही टॉरपीडो दाग सकती है.
पुतिन की खामोशी रणनीतिक

रूसी सबमरीन का हमला न करना कमजोरी नहीं, बल्कि रणनीतिक संयम था. अगर रूसी सबमरीन टॉरपीडो दाग देती, तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध का सामना कर रही होती. रूस अब इसका जवाब कूटनीतिक तरीके से या किसी और मोर्चे जैसे यूक्रेन या साइबर अटैक पर देगा. समुद्र में उस वक्त खामोश रहना ही रूसी कमांडर के लिए एकमात्र विकल्प था. आसान शब्दों में कहें तो आप एक शतरंज के प्यादे को बचाने के लिए अपने वजीर की कुर्बानी नहीं देते, खासकर तब जब सामने वाला खिलाड़ी पूरी तैयारी के साथ बैठा हो.