नई दिल्ली
दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावों में EVM यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। याचिका के जरिए मांग की गई थी कि चुनावों में EVM के इस्तेमाल पर रोक लगा दी जाए। उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को 'इन कामों में न पड़ने' की सलाह दी है। खास बात है कि विपक्ष लगातार चुनाव आयोग पर सवाल उठा रहा है।
बार एंड बेंच के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावों में मशीन के इस्तेमाल के खिलाफ पहुंची याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा, 'इन सब कामों में मत पड़िए। कुछ अच्छा काम करें।'
चुनाव आयोग ने किए बदलाव
EVM अब उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें होंगी और इसकी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनावों से होगी। वर्ष 2015 से EVM पर उम्मीदवारों की श्वेत-श्याम तस्वीरें होती थीं, जिन्हें पहचानना कई मतदाताओं के लिए मुश्किल होता था। निर्वाचन आयोग ने EVM मतपत्रों की स्पष्टता और पठनीयता बढ़ाने के लिए चुनाव संचालन नियम, 1961 की धारा 49बी के तहत EVM मतपत्रों के डिजाइन व मुद्रण के मौजूदा दिशानिर्देशों में संशोधन किया है।
आयोग ने बीते सप्ताह बताया, 'अब से EVM पर उम्मीदवारों की रंगीन तस्वीरें छपी होंगी। बेहतर दृश्यता के लिए उम्मीदवार का चेहरा तस्वीर के तीन-चौथाई हिस्से पर होगा।' उम्मीदवारों के क्रमांक और इनमें से कोई नहीं (नोटा) विकल्प भारतीय अंकों के अंतरराष्ट्रीय रूप में छपे होंगे। स्पष्टता के लिए फॉन्ट का आकार 30 होगा और बोल्ड में लिखा होगा।
आयोग ने बताया कि एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए सभी उम्मीदवारों के नाम और ‘नोटा’ विकल्प एक ही फॉन्ट प्रकार और आसानी से पढ़े जाने योग्य बड़े आकार में छपे होंगे। EVM मतपत्र 70 जीएसएम कागज पर मुद्रित किए जाएंगे।
विधानसभा चुनावों के लिए निर्दिष्ट ‘आरजीबी वैल्यू’ वाले गुलाबी रंग के कागज का उपयोग किया जाएगा। आयोग ने बताया कि आगामी चुनावों में उन्नत EVM मतपत्रों का उपयोग किया जाएगा, जिसकी शुरुआत बिहार से होगी।
आयोग के मुताबिक, जब 10 साल पहले तस्वीरों का इस्तेमाल शुरू किया गया था, तब इसका उद्देश्य उन निर्वाचन क्षेत्रों में भ्रम की स्थिति से बचना था, जहां कई उम्मीदवारों के नाम एक जैसे थे या उनके नाम एक जैसे लगते थे। भारतीय निर्वाचन आयोग ने बताया कि मशीनों पर सीरियल नंबर भी अधिक प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाएगा।

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