पटना
बिहार में बीते तीन दशकों में अपनी राजनीतिक जमीन गंवाने वाली कांग्रेस पुरानी गलतियों से सबक लेकर आगे देख रही है। मतदाता और आमजन से अपनी दूरी पाटने के लिए बिहार विधानसभा चुनाव के पूर्व संवाद और संपर्क के जरिये कांग्रेस अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटी है। वह ऐसे मुद्दों पर मुखर हो रही है जिनका सीधा वास्ता आमजन से है।
मसला बिहार लोक सेवा आयोग परीक्षार्थियों का हो, युवाओं के बिहार से पलायन, नौकरी या फिर रोजगार का हो या फिर अस्पतालों में मरीजों को समय पर इलाज देने का, इन मुद्दों पर सरकार की घेराबंदी में पार्टी कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही।
अपने अभियान की इस कड़ी में आगे बढ़ते हुए पार्टी ने अब चुनावी तैयारियों और चुनाव के मुद्दों पर चर्चा के लिए पार्टी विधायक दल की एक बैठक 15 जून को बुलाई है। बैठक में पार्टी के सभी विधायक, विधान पार्षद समेत पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता शामिल होंगे। प्रदेश अध्यक्ष राजेश कुमार और प्रभारी कृष्णा अल्लावारू की उपस्थिति में होने वाली बैठक में जहां विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर नेता आपसी संवाद करेंगे वहीं जनहित के वैसे मुद्दे जो आज ज्वलंत हैं उन पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा चरणवार राज्यव्यापी आंदोलन की रूपरेखा बनेगी।
चर्चा है कि पार्टी ने महागठबंधन की एक दिन पूर्व हुई बैठक के आलोक में यह बैठक बुलाई है। जिसमें नेता वैसी सीटों की पहचान कर उन्हें सूचीबद्ध करेंगे जहां पार्टी मजबूत स्थिति में हैं। यह सूची महागठबंधन के प्रमुख दल के मुखिया और महागठबंधन की समन्वय समिति के अध्यक्ष को दी जाएगी। पार्टी ने अपने सभी विधायकों और पार्षदों के साथ वरिष्ठ नेताओं को 15 जून की बैठक की सूचना भेज दी है।

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