नई दिल्ली
ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को लेकर पूरी दुनिया में असमंजस की स्थिति है। झारखंड से कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने चिंता जताते हुए कहा कि मौजूदा हालात ऐसे लगते हैं मानो “प्यार और जंग में सब जायज” वाली स्थिति हो, लेकिन हकीकत यह है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध के भी नियम और मानक होते हैं, जिनका पालन जरूरी है। उन्होंने एएनआई से बातचीत में मोदी सरकार से एक अपील भी की।
उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा संघर्ष में अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी की जा रही है और ऐसे ठिकानों पर हमले हो रहे हैं, जिनका असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। खास तौर पर ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर हमलों से वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संकट जैसी स्थिति पैदा हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय संगठनों से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस सांसद ने कहा कि यूएनओ समेत सभी बड़े अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकसित देशों को इस स्थिति में आगे आकर पहल करनी चाहिए, ताकि तनाव को कम किया जा सके और हालात नियंत्रण में आएं। सुखदेव ने स्पष्ट कहा कि युद्ध किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। उन्होंने भारत की भूमिका को “शांति के दूत” के रूप में बताते हुए कहा कि ऐसे समय में भारत को शांति स्थापित करने के प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए।
सरकार से अपील
उन्होंने कहा कि देश में एलपीजी संकट गहरा है और सरकार भी यह स्वीकार कर चुकी है। यह मांग की कि मौजूदा संसद सत्र के दौरान केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को इस मुद्दे पर स्पष्ट नीति सामने रखनी चाहिए। संसद में इस पर चर्चा होनी चाहिए ताकि देश में किसी तरह की भ्रम की स्थिति न रहे। खाड़ी देशों पर जो भी दुष्प्रभाव पड़ेगा, उसका सबसे ज्यादा असर भारत पर पड़ेगा। भारत को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए कि वह आज कहां खड़ा है। क्या वह ईरान के साथ है या इजरायल के साथ? आमजन इससे ज्यादा प्रभावित होते हैं।
उन्होंने आगे कहा कि मौजूदा संकट से महंगाई बढ़ेगी। राहुल गांधी कई बार इस मुद्दे को उठा चुके हैं। सरकार कहती है कि पैनिक स्थिति नहीं है। अगर नहीं है तो सरकार को स्पष्ट करना चाहिए क्या आपने इस संकट के समाधान का कोई रास्ता निकाला है? गैस के लिए लोग अभी भी लगातार लाइन में खड़े हैं। अगर नॉर्मल स्थिति आ गई है तो बुकिंग के बाद भी लोगों को लाइन पर क्यों खड़ा होना पड़ रहा है। लेकिन बीच में जो हालात हुए थे, वैसी स्थिति न हो। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि हमारी तैयारी कितनी पूरी है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर सिर्फ संबंधित देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया को आर्थिक और ऊर्जा संकट जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।

More Stories
पश्चिम एशिया संकट के बीच PM मोदी की हाई लेवल मीटिंग, बिजली-पेट्रोलियम पर अहम मंथन
असम में कांग्रेस का बड़ा दांव: छह दलों से गठबंधन, BJP की बढ़ी मुश्किलें
1 मई से सख्ती: अनफिट क्रू की उड़ानों पर रोक, बढ़ता वजन अब सैलरी पर डालेगा असर