उज्जैन
श्री महाकालेश्वर मंदिर से सटे इलााके में बुधवार को फिर बुलडोजर गरजा. थाना महाकाल क्षेत्र अंतर्गत आने वाली बेगमबाग कॉलोनी में अवैध निर्माण को हटाया गया. यहां पर 23 मई को भी बुलडोजर की कार्रवाई हुई थी. इस दौरान 3 प्रॉपर्टी ध्वस्त करने के बाद 4 और अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए. इस दौरान शांति बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल भी तैनात रहा.
प्रशासन ने कुल 28 प्रॉपर्टी चिह्नित की
गौरतलब है कि बेगमबाग कॉलोनी श्री महाकाल मंदिर से 500 मीटर के दायरे में आती है. महाकालेश्वर मंदिर जाने के लिए यहीं से मुख्य रास्ता भी है. यहां ब्रिज का निर्माण, सड़क चौड़ीकरण व अन्य कार्य किए जाने हैं. इस क्षेत्र में उज्जैन विकास प्राधिकरण ने कुल 28 मकान-दुकान चिह्नित किए हैं. इन प्रॉपर्टी के मालिकों ने नियम-शर्तों का उल्लंघन किया है, जिन्हें ध्वस्त किया जाना है. सभी 28 प्रॉपर्टी संचालकों ने न्यायालय से स्टे लिया है, जिसकी समय सीमा खत्म होती जा रही. अब तक कुल 7 प्रॉपर्टी ध्वस्त की जा चुकी हैं. प्रशासन का कहना है कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी.
महाकाल क्षेत्र में सुबह से गरजा बुलडोजर
उज्जैन विकास प्राधिकरण सीईओ संदीप सोनी ने बताया "श्री महाकाल मंदिर क्षेत्र में बेगमबाग मोहल्ला है, जहां 1998 में विकास प्राधिकरण ने जमीन दुकानें लीज पर दी थीं. सर्वे में पाया गया कि लीज रिन्यू नहीं करवाई गई. दुकानों के साथ ही इस एरिया को रहवासी भी बना लिया. नोटिस दिए पर जवाब नहीं मिला तो अब ध्वस्तीकरण के लिए 7 दिन में खाली करने के नोटिस जारी किए गए थे. अब कार्रवाई की जा रही है." IPS राहुल देशमुख ने बताया "शांति बनाए रखने के लिए 250 से अधिक पुलिस बल तैनात है. कार्रवाई शांतिपूर्वक जारी है."

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240