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जयपुर
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के तहत अलवर नगर निगम के नतीजों के बाद अब नगर सरकार की तस्वीर अब साफ होती नजर आ रही है. 65 वार्डों वाले अलवर नगर निगम में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत न मिलने के बाद निर्दलीय पार्षदों की भूमिका सबसे अहम हो गई थी. बीजेपी ने दावा किया है कि अब 9 निर्दलीय पार्षदों ने भारतीय जनता पार्टी को अपना समर्थन दे दिया है, जिसके साथ ही बीजेपी ने बहुमत का जरूरी आंकड़ा (33) आसानी से पार कर लिया है.
भाजपा का दावा है कि उनके पास 9 से 11 पार्षदों का समर्थन है. जबकि कांग्रेस का दावा है कि उनके पास 8 पार्षदों का समर्थन है. दोनों ही पार्टी मेयर बनने के लिए दावा ठोक रही है. भाजपा की तरफ से पूर्व सभापति अजय अग्रवाल की पत्नी सुमन लता अग्रवाल ने मेयर के लिए नामांकन पत्र भरा है जबकि कांग्रेस की तरफ से तीन नामांकन पत्र लिए गए हैं. इसमें से एक नामांकन पत्र पूर्व कांग्रेस जिला अध्यक्ष की पत्नी द्वारा भरा गया है.
9 और 11 सितंबर को दो चरणों में हुए मतदान के बाद 14 सितंबर को मतगणना पूरी हुई थी. घोषित नतीजों में 65 वार्डों में से बीजेपी ने सबसे ज्यादा 28 सीटों पर जीत हासिल की. वहीं, मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को 23 सीटों से ही संतोष करना पड़ा. इसके अलावा 13 वार्डों पर निर्दलीय प्रत्याशियों ने परचम लहराया था, जबकि 1 सीट बहुजन समाज पार्टी (BSP) के खाते में गई थी.
निर्दलीयों ने पलटी बाजी
अलवर में महापौर (मेयर) की कुर्सी तक पहुंचने के लिए 33 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी. बीजेपी के पास 28 सीटें थीं, यानी उसे केवल 5 और पार्षदों की जरूरत है दूसरी तरफ, कांग्रेस भी निर्दलीयों के भरोसे बोर्ड बनाने की जुगत में लगी हुई है.
9 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन मिलते ही भाजपा का कुल आंकड़ा 37 तक पहुंच जाएगा, जो कि 33 के मैजिक नंबर से 4 ज्यादा है. स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि शहर के विकास को रफ्तार देने के लिए निर्दलीय पार्षदों ने पार्टी की नीतियों और विजन में विश्वास जताया है.

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