भोपाल
हज यात्रा की सुविधा में प्रदेश एक पायदान पीछे हो गया। इम्बारकेशन प्वॉइंट की सूची से इस बार भोपाल का नाम हटा दिया गया है। सूची में देश के 17 शहरों में प्रदेश से अब सिर्फ इंदौर ही शामिल है। यहीं से मक्का-मदीना जाने के लिए सीधी उड़ान मिलेगी। यानी, भोपाल के यात्रियों को हज पर जाने के लिए इंदौर से उड़ान लेनी होगी।
सेंट्रल हज कमेटी ने हजयात्रा की गाइडलाइन जारी कर दी है। 30 जुलाई तक इसके आवेदन की प्रक्रिया चलेगी। नई गाइडलाइन में इंदौर समेत देश के 17 शहरों से ही इंटरनेशनल फ्लाइट मिलेगी। यात्रियों को आवेदन फॉर्म में इन प्वॉइंट को शामिल करना होता है। बता दें, पिछले साल प्रदेश से हज यात्रा पर 8500 लोग रवाना हुए थे।
हज यात्रा के ये प्वॉइंट
— श्रीनगर
–गया
— गुवाहाटी
— इंदौर
— जयपुर
–नागपुर
— दिल्ली
— मुंबई
— कोलकाता
— बेंगलूरु,
— हैदराबाद
— कोचीन
— अहमदाबाद
— चेन्नई
— लखनऊ
— कालीकट (कोझीकोड)।
संगठनों का विरोध, बोेले-भोपाल के साथ नाइंसाफी
इम्बारकेशन प्वॉइंट से भोपाल का नाम कटने के बाद संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया है। उनका कहना है, राजधानी होने के बाद भी नाम हटाना, भोपाल के साथ बड़ी नाइंसाफी है। ऑल इंडिया हज वेलफेयर सोसायटी के मोहम्मद तौफीक ने बताया कि हज कमेटी समेत पीएमओ को पत्र भेजेंगे। नाम शामिल कराने की बात कही गई है।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240