मुंबई
अगर आप अगले हफ्ते बैंक जाने की योजना बना रहे हैं, तो सावधान हो जाइए! यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) ने 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है। इससे देशभर में सार्वजनिक और निजी दोनों बैंकों की सेवाएं बाधित हो सकती हैं। हड़ताल का आह्वान भारतीय बैंकों के संगठन इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (IBA) के साथ बातचीत असफल होने के बाद किया गया।
किन बैंकों पर पड़ेगा असर?
हालांकि SBI, PNB, BoB, ICICI और HDFC बैंक ने हड़ताल को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन ANI की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस हड़ताल का असर सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र और ग्रामीण बैंकों (Regional Rural Banks) पर पड़ सकता है। इससे ग्राहकों को चार दिन तक बैंकिंग सेवाओं में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है।
क्या है UFBU और कौन से बैंक यूनियन इसमें शामिल हैं?
यूनाइटेड फ़ोरम ऑफ़ बैंक यूनियन्स (UFBU) एक संगठन है जिसमें 9 प्रमुख बैंक यूनियन्स शामिल हैं। यह 8 लाख से अधिक बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है।
इसमें शामिल प्रमुख यूनियन्स हैं- ऑल इंडिया बैंक एम्प्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC), नेशनल कॉन्फेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज (NCBE), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA)।
बैंक यूनियनों की मांगें क्या हैं?
बैंक यूनियनों ने अपनी कई मांगें सरकार और IBA के सामने रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
बैंकों में सभी पदों पर पर्याप्त भर्ती की जाए, ताकि शाखाओं में स्टाफ की कमी न हो और ग्राहक सेवा बेहतर हो सके।
बैंकों में काम कर रहे अस्थायी कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
सभी बैंकों के लिए पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू किया जाए, जैसे कि RBI, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों में लागू है।
परफॉर्मेंस रिव्यू और परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम को वापस लिया जाए, जिससे नौकरी की सुरक्षा बनी रहे और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की स्वायत्तता कमजोर न हो।
बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि ग्राहकों द्वारा किसी भी प्रकार की हिंसा या दुर्व्यवहार से बचा जा सके।
मैनपावर घटने से बैंकिंग सेवाएं हो रहीं प्रभावित
बैंक कर्मी संगठनों ने कहा कि पिछले 11 साल में देश के सार्वजनिक बैंकों में एक लाख 39 हजार 811 कर्मी घट गए हैं। ये पद्द रिक्त हैं। सरकारी बैंकों में ग्राहकों की सेवा के लिए पर्याप्त कर्मचारी उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। बैंक शाखाओं में कर्मियों की बड़ी कमी के कारण संतोषजनक सेवाएं नहीं मिलने से अनियंत्रित लोगों कर्मियों पर हमला कर देते हैं। इस लिए बैंकों में पर्याप्त संख्या में कर्मियों की नियुक्ति की जाए और कर्मियों की सुरक्षा की व्यवस्था की जाय, ताकि ग्राहकों को संतोषजनक सेवाएं प्रदान की जा सकें और कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार कम किया जा सके।
बैंककर्मियों की मांग
सभी संवर्गों में पर्याप्त भर्ती, अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने
बैंकिंग क्षेत्र में सप्ताह में पांच दिन काम का नियम लागू करने
परफॉर्मेंस रिव्यू और पीएलआई संबंधित सरकारी निर्देश वापस हो
अनियंत्रित जनता के हमले से बचाने के लिए बैंक कर्मियों की सुरक्षा
सरकारी बैंकों में कामगार, अधिकारी और निदेशकों के रिक्त पदों की नियुक्ति
सरकारी कर्मियों के तर्ज पर 25 लाख रुपए की सीमा बढ़ाने के लिए ग्रेच्युटी अधिनियम में संशोधन
सरकारी बैंकों में खाली पदों को जल्द भरा जाए।
ग्रेच्युटी एक्ट में संशोधन कर इसकी अधिकतम सीमा ₹25 लाख की जाए, जैसा कि सरकारी कर्मचारियों के लिए लागू है।
बैंकिंग क्षेत्र में स्थायी नौकरियों की आउटसोर्सिंग को बंद किया जाए।
बैंकिंग सेक्टर में किसी भी प्रकार की अनुचित श्रम नीतियों पर रोक लगाई जाए।
चार दिन तक बैंक सेवाएं रहेंगी प्रभावित
22 मार्च को महीना का चौथा शनिवार है, जो सभी सरकारी और निजी बैंकों के लिए अवकाश होता है। 23 मार्च को रविवार होने के कारण बैंकों की छुट्टी रहेगी। 24 और 25 मार्च को दो दिवसीय हड़ताल होने के कारण बैंक बंद रहेंगे। इसका मतलब है कि बैंकिंग सेवाएं लगातार चार दिन तक प्रभावित रहेंगी।
किन सेवाओं पर पड़ेगा असर?
ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कॉन्फेडरेशन (AIBOC) के उपाध्यक्ष पंकज कपूर ने ANI को बताया कि हड़ताल के कारण चेक क्लीयरेंस, नकद लेन-देन, ऋण सेवाएं और धन प्रेषण जैसी बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होंगी।
हालांकि, ATM, UPI और इंटरनेट बैंकिंग सेवाएं जारी रहेंगी, लेकिन बड़ी राशि के ट्रांजेक्शन और चेक क्लीयरेंस में देरी हो सकती है।

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