31 दिसम्बर 2025 को 19849 मेगावाट डिमांड की सफलतापूर्वक आपूर्ति
भोपाल
विदा लेते वर्ष 2025 में प्रदेश ने ऊर्जा क्षेत्र में फिर से एक नया कीर्तिमान दर्ज कर लिया है। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने बताया कि वर्ष के अंतिम दिन 31 दिसम्बर 2025 को सुबह 10:44 बजे प्रदेश की बिजली प्रणाली ने उस समय नया आयाम स्थापित किया, जब प्रदेश में 19849 मेगावाट बिजली की डिमांड को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस दौरान प्रदेश की विद्युत कंपनियों ने बेहतरीन समन्वय बनाकर निर्वाध विद्युत आपूर्ति की। ऊर्जा मंत्री श्री तोमर ने सभी विद्युत कंपनियों को इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर बधाई देते हुये कहा कि यह विद्युत कार्मिकों की मेहनत, समर्पण का परिणाम है। श्री तोमर ने बताया कि अधिकतम डिमांड के समय मध्यप्रदेश के उत्पादन केन्द्रों, लाईनों और सबस्टेशनों से निर्वाध विद्युत आपूर्ति की गई।
प्रदेश में कैसी रही बिजली की मांग
एम.पी. पावर ट्रांसमिशन कंपनी (एम.पी. ट्रांसको) के मुख्य अभियंता श्री राजेश गुप्ता ने जानकारी दी कि प्रदेश में जब बिजली की मांग 19849 मेगावाट पर दर्ज हुई उस दौरान मध्यप्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (जबलपुर, सागर व रीवा संभाग) में 5351 मेगावाट, मध्यप्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (भोपाल व ग्वालियर संभाग) में 6171 मेगावाट, मध्यप्रदेश पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी (इंदौर व उज्जैन संभाग) में 7911 मेगावाट, एसईज़ेड एवं रेलवे में 416 मेगावाट बिजली की मांग दर्ज हुई।
ऐसे हुई आपूर्ति
अधिकतम मांग के समय ताप विद्युत गृहो से 3638 मेगावाट, जल विद्युत गृहों से 1568 मेगावाट, नवकरणीय ऊर्जा 1456 मेगावाट व एनटीपीसी, बैंकिंग एवं अन्य सोर्स से कुल 13187 मेगावाट बिजली प्राप्त हुई।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240