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लखनऊ
उत्तर प्रदेश की सियासत में 'चुनावी मास्टरमाइंड' कहे जाने वाले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह एक बार फिर सूबे के रण में उतर रहे हैं. मिशन-2027 को ध्यान में रखते हुए लखनऊ के राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय स्थित भीमराव आंबेडकर प्रेक्षागृह में आयोजित भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति बैठक में अमित शाह शिरकत करेंगे और सत्ता की हैट्रिक का मंत्र देंगे।
अमित शाह प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में बूथ प्रबंधन को धार देने के साथ-साथ यूपी के बिगड़े सियासी समीकरण को भी दुरुस्त करेंगे. इसके साथ अपने उस पुराने और आजमाए हुए 2014 और 2017 के 'विनिंग फॉर्मूले' को फिर से एक्टिव करने का प्लान है, जिसने पार्टी को राज्य में अभूतपूर्व सफलता दिलाई थी।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच बीजेपी अपनी सबसे बड़ी बैठक कर रही है, जो दो दिनों तक चलेगी. इस प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में 2850 प्रतिनिधियों को बुलाया गया है, जिन्हें अमित शाह संबोधित करेंगे. इसके साथ ही बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति में राजनीतिक प्रस्ताव भी पास किए जाएंगे।
मिशन-2027 के लिए शाह की पाठशाला
यूपी विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी अब पूरी तरह से अपने अभियान को शुरू करने जा रही है, जिसका आगाज शुक्रवार को प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के साथ हो रहा है. अमित शाह प्रदेश कार्यसमिति के मुख्य वक्ता होंगे जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसका समापन करेंगे।
बीजेपी की इस बैठक में उत्तर प्रदेश से केंद्र में शामिल मंत्रियों, मुख्यमंत्री, दोनों मुख्यमंत्रियों, सभी सांसदों, राज्यसभा सदस्यों, प्रदेश सरकार के मंत्रियों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों को शिरकत करनी है. इसके अलावा 2024 के लोकसभा और 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी के टिकट से चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी भी शामिल होंगे. प्रदेश से लेकर जिला इकाइयों के अध्यक्षों व महामंत्रियों तथा सभी मोर्चों के अध्यक्षों एवं महामंत्रियों को भी बुलाया गया है।
2027 के जीत का मंत्र देंगे अमित शाह
माना जा रहा है कि अमित शाह 2027 के चुनाव की जीत का मंत्र कार्यकर्ताओं को देंगे. 2014, 2017 और 2019 की जीत के मॉडल बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों का मंत्र देंगे. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी का सियासी समीकरण गड़बड़ा गया है और विधान परिषद के चुनाव ने पार्टी की टेंशन बढ़ा दी है।
प्रदेश कार्यसमिति की बैठक में विपक्षी दलों के नैरेटिव, जातिवाद, यूजीसी एवं आरक्षण के असर से निपटने की रणनीति के साथ ही एमएलसी चुनाव में कमजोर प्रदर्शन पर भी मंथन होगा. गुरुवार को प्रदेश कार्यालय में हुई बैठक में राजनीतिक प्रस्ताव पढ़ा गया, जिसमें युवाओं, किसानों, महिलाओं, ओबीसी एवं एससी का भरोसा जीतने पर फोकस करने के लिए कहा गया है. ऐसे में भाजपा के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव बड़ी चुनौती बनकर खड़ा है।
बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने कहा कि संगठनात्मक कार्यों की समीक्षा करने एवं आगामी कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर होगा. पार्टी पदाधिकारियों का कहना है कि विधानसभा चुनाव से ठीक पहले संगठन की सबसे बड़ी बैठक सीधे तौर पर चुनावी रणनीति पर फोकस होगी।
2014 और 2017 का 'शाह फॉर्मूला'?
2013-14 में जब अमित शाह को यूपी का प्रभारी बनाया गया था, तब उन्होंने सपा-बसपा के पारंपरिक यादव, मुस्लिम और जाटव वोटबैंक (लगभग 40%) की काट के लिए बाकी बचे 60% वोटबैंक को एकजुट किया. इसमें अपर कास्ट, गैर-यादव ओबीसी (कुर्मी, मौर्य, निषाद, राजभर आदि) और गैर-जाटव दलित जातियों का बड़ा गठबंधन तैयार किया गया था. इसके चलते बीजेपी यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 71 सीटें जीतने में सफल रही थी और दो सीटें सहयोगी दलों को मिली थीं।
2017 के विधानसभा चुनाव में अमित शाह ने बीजेपी अध्यक्ष रहते हुए यूपी के हर बूथ पर 'पन्ना प्रमुख' की अवधारणा को मजबूती से लागू किया और पचमढ़िया सम्मेलनों के जरिए जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधा पार्टी से जोड़ा. इसके अलावा छोटे और क्षेत्रीय दलों अपना दल और सुभासपा को साथ लाकर गैर-यादव पिछड़ी जातियों में अपनी पकड़ मजबूत की थी, जिसके बदौलत 2017 में बीजेपी रिकॉर्ड सीटों के साथ यूपी की सत्ता में आई थी।
विनिंग फॉर्मूले को एक्टिव करने का प्लान?
2024 के लोकसभा चुनावों में सपा के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) कार्ड और कांग्रेस-सपा गठबंधन के चलते यूपी में भाजपा की सीटों में गिरावट दर्ज की गई. इसके साथ ही जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी और स्थानीय स्तर पर तालमेल की कमी जैसी शिकायतें सामने आईं. एमएलसी के चुनाव में भी बीजेपी को झटका लगा है, क्योंकि सपा तीन सीटों से बढ़कर 5 पर पहुंच गई है।
यूपी में बीजेपी ने अलग-अलग जातियों में बिखरे जिन हिंदुओं को एकजुट किया था, वे फिर छिटकते हुए नजर आए हैं. इसके चलते बीजेपी का ग्राफ यूपी में लगातार घट रहा है. यही वजह है कि भाजपा अब फिर से अपने 'मूल मंत्र' की ओर लौट रही है ताकि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों और सांगठनिक मशीनरी को पूरी तरह दुरुस्त किया जा सके।
यूपी की 'चुनावी पाठशाला' का मुख्य प्लान
अमित शाह का प्राथमिक फोकस बूथ समन्वयकों और शक्ति केंद्र के कार्यकर्ताओं में नया जोश भरना है ताकि प्रदेश में जमीनी स्तर की नाराजगी दूर हो सके. कार्यकर्ताओं को फिर से एक्टिव करने का प्लान है, जो किसी न किसी वजह से नाराज होकर घर बैठ गए हैं।
शाह का प्लान यूपी में गैर-यादव ओबीसी और गैर-जाटव दलित वोटबैंक को फिर से गोलबंद करने का है ताकि बिगड़े सियासी समीकरण को फिर एक बार एक्टिव किया जा सके. इसके साथ ही सहयोगियों के साथ सीट और सम्मान का सही तालमेल बिठाना है. 2027 का चुनाव बीजेपी के लिए काफी अहम माना जा रहा है।

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