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उदयपुर
उदयपुर शहर की आबोहवा छह साल में इस अगस्त जितनी जहरीली कभी नहीं रही। एयर क्वालिटी इंडेक्स के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2021 से 2025 तक शहर की हवा ज्यादातर दिन मॉडरेट यानी सामान्य श्रेणी में दर्ज हुई थी। पिछले साल अगस्त में पूरे 31 दिन सामान्य रहे, 2023 और 2024 में भी 90 फीसदी से ज्यादा दिन मॉडरेट में गुजरे। पर, बीते अगस्त ने रुझान पूरी तरह तोड़ दिया। यही नहीं सितंबर के पहले सप्ताह में भी हवा गुणवत्ता खराब बनी हुई है। आमतौर पर दिवाली के आसपास प्रदूषण का जो स्तर होता है, वह इन दिनों है।
इस साल के अगस्त के 31 दिनों में से 23 दिन खराब और सात दिन सीधे हानिकारक श्रेणी में रहे हैं। यानी हर तीसरा दिन ऐसा रहा, जब सांस लेना सेहत के लिए नुकसानदेह साबित हुआ। इसके उलट, अच्छी श्रेणी का एक भी दिन बीते अगस्त में दर्ज नहीं हुआ, जबकि 2024 में तीन और 2022 में एक दिन इस श्रेणी में मिला था। 2021 में भी 25 दिन खराब श्रेणी में रहे थे, लेकिन उस साल एक भी दिन हानिकारक स्तर तक नहीं पहुंचा था। जबकि इस साल सात दिन इस निशान को पार कर गए।
इसलिए मनाया जाता है इंटरनेशनल डे
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2019 में यह दिवस घोषित किया था, जो पहली बार 7 सितंबर 2020 को मनाया गया। इसका उद्देश्य वायु प्रदूषण के प्रति जागरुकता बढ़ाना और साफ हवा के लिए प्रेरित करना है। ऐसी हवा, जिसमें प्रदूषण का स्तर इतना कम हो कि इंसान स्वस्थ हवा में सांस ले सके। इस बात पर जोर दिया जाता है कि साफ दिखाई देने वाला आसमान हमेशा साफ हवा की गारंटी नहीं है।
सबसे भारी रहे ये दिन
बीते अगस्त में 28 तारीख को सबसे ज्यादा (168 एक्यूआई) दर्ज हुआ, जो महीने का सबसे प्रदूषित दिन रहा। इसके अलावा 20 से 24 अगस्त के बीच लगातार 5 दिन शहर हानिकारक श्रेणी में झेलता रहा। पिछले पांच सालों में ऐसा कोई लगातार दौर सामने नहीं आया है।
ऐसे समझें AQI कितना खराब और कितना अच्छा
0-50 तक अच्छा
51-100 तक सामान्य
101-150 तक खराब
151-200 हानिकारक
201-300 तक बेहद खराब
301 से ऊपर खतरनाक
वर्षवार अगस्त में एक्यूआई (दिनों की संख्या)
वर्ष अच्छा सामान्य खराब हानिकारक
2021 00 05 25 01
2022 01 23 07 00
2023 00 30 01 00
2024 03 28 01 00
2025 00 31 00 00
2026 00 01 23 07
नोट: बेहतर खराब और खतरनाक श्रेणी के दिनों को शामिल नहीं किया गया है।
इनका कहना है…
इस साल बरसात नहीं होना सबसे बड़ा कारण है, जिससे प्रदूषक तत्व वातावरण में देर तक टिके हुए हैं। साथ ही पूर्व में हुई बरसात के बाद सड़कों के क्षतिग्रस्त होने से उड़ने वाली धूल भी वजह रहती है। शहर में बड़े निर्माण कार्य भी चल रहे हैं।
-विनय कट्टा, क्षेत्रीय अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण मंडल

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