मुंबई
महाराष्ट्र के अंबरनाथ नगर परिषद में हुआ बीजेपी-कांग्रेस का गठबंधन कुछ ही वक्त में टूट गया है. बुधवार को इससे जुड़ी खबर सामने आई थी, जिसके बाद दोनों ही पार्टियों की किरकिरी हो रही थी. अब कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं. दूसरी तरफ सीएम देवेंद्र फडणवीस ने भी इसपर आपत्ति जताई थी.
बता दें कि अंबरनाथ नगर परिषद में एकनाथ शिंदे की पार्टी का खेल बिगाड़ने के लिए दोनों दल साथ आए थे. लेकिन ये समीकरण ज्यादा नहीं टिक पाया.अब कांग्रेस ने अंबरनाथ के ब्लॉक अध्यक्ष को सस्पेंड किया है. बीजेपी के साथ स्थानीय स्तर पर अलायंस करने के लिए उनपर एक्शन हुआ है.
सीएम फडणवीस ने लगाई थी फटकार
कांग्रेस के एक्शन से पहले सीएम देवेंद्र फडणवीस ने अंबरनाथ और अकोला में कांग्रेस और एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने के आरोप में भाजपा नेताओं की कड़ी आलोचना की और कार्रवाई की चेतावनी दी थी. उन्होंने साफ किया था कि इस तरह के गठबंधन पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व की मंजूरी के बिना किए गए हैं और संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन करते हैं.
फडणवीस ने कहा था, 'मैं यह स्पष्ट कर रहा हूं कि कांग्रेस या AIMIM के साथ किसी भी तरह का गठबंधन स्वीकार्य नहीं होगा. अगर किसी स्थानीय नेता ने ऐसा फैसला अपनी मर्जी से लिया है, तो यह अनुशासन के विरुद्ध है और इसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.' उन्होंने आगे कहा कि ऐसे गठबंधनों को रद्द करने के निर्देश पहले ही जारी किए जा चुके हैं.
अंबरनाथ नगर परिषद का समीकरण
अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 59 पार्षद हैं. यहां 20 दिसंबर 2025 में चुनाव हुए थे. फिर 21 को नतीजे आए. एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनी. उसने 27 सीटें जीतीं (बहुमत से सिर्फ 4 कम).
वहीं, अन्य पार्टियों में बीजेपी (15), कांग्रेस (12), NCP (अजित पवार गुट) (4) को कुल 31 सीट मिली.
दूसरी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी ने शिवसेना (शिंदे) को सत्ता से दूर रखने के लिए कांग्रेस से गठबंधन किया. इस गठबंधन को ‘अंबरनाथ विकास अघाड़ी’ नाम दिया गया, जिसके पास 31 पार्षदों का समर्थन है, जो बहुमत के आंकड़े 30 से एक अधिक है.
अंबरनाथ में कांग्रेस-बीजेपी गठबंधन को लेकर शिवसेना (शिंदे) के नेताओं में नाराजगी थी. शिवसेना (शिंदे) के विधायक डॉक्टर बालाजी किनीकर ने इसे शिवसेना के साथ विश्वासघात बताया था. उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मुक्त भारत की बात करने वाली बीजेपी का अंबरनाथ की सत्ता के लिए कांग्रेस के साथ गठबंधन करना शिवसेना (शिंदे) की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है.

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