भोपाल
नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के निर्देश पर भोपाल में आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित की जा रही है। कार्यशाला के पहले दिन योजना से जुड़ी चुनौतियों पर व्यापक चर्चा हुई। योजना के तहत हर मरीज को केशलेस और मुफ्त इलाज मिलना चाहिए, लेकिन कुछ अस्पताल एक्स्ट्रा चार्ज या अन्य बहानों से अवैध वसूली कर रहे हैं। ऐसे कई शिकायतें हमें मिली हैं।
योगेश भरसट ने कहा कि इन शिकायतों का सत्यापन कर समाधान निकालना भी चुनौतीपूर्ण काम है। धोखाधड़ी रोकने के लिए नई व्यवस्था बनाई जा रही है। यदि किसी मरीज को इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार होना पड़ता है और वह प्रमाण के साथ शिकायत दर्ज कराता है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी। मरीज को उसका पैसा दिलाने के साथ-साथ संबंधित अस्पताल पर तीन गुना तक का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि किसी अस्पताल के खिलाफ एक से अधिक शिकायतें पाई जाती हैं तो उनके खिलाफ कड़े कदम भी उठाए जाएंगे।
कार्यशाला में कुल 27 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से योजना से जुड़े दो-दो अधिकारी शामिल हुए। साथ में NHA के अधिकारियों ने भी भाग लिया।
दूरदराज इलाकों में अस्पतालों की कमी भी समस्या योगेश भरसट ने यह भी स्वीकार किया कि भोपाल, ग्वालियर, इंदौर और जबलपुर जैसे महानगरों में योजना से जुड़े अस्पतालों की संख्या अच्छी है और मरीजों को योजना के तहत इलाज आसानी से मिल रहा है। लेकिन अलीराजपुर, अनूपपुर, मऊगंज, पंडुगा, निवाड़ी जैसे दूरदराज जिलों में अस्पतालों की कमी है, जिससे वहां के मरीजों को बड़े शहरों में इलाज के लिए जाना पड़ता है और यात्रा, ठहरने व अन्य खर्च बढ़ जाते हैं। इस समस्या का समाधान करने के लिए इन क्षेत्रों में नए अस्पताल खोजकर उन्हें योजना से जोड़े जाने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
सात साल पूरे होने पर कार्यशाला यह कार्यशाला आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB-PMJAY) के सात साल पूरे होने पर इसे नई दिशा देने के उद्देश्य से आयोजित की गई है। इस योजना की शुरुआत 2018 में झारखंड से की गई थी और अब 2030 तक AB-PMJAY 2.0 के रूप में इसे और अधिक सक्षम बनाना लक्ष्य है। कार्यशाला में बीते सात वर्षों में मिली उपलब्धियों और आयी समस्याओं पर भी चर्चा हुई ताकि सफल मॉडलों को अन्य राज्यों में अपनाया जा सके।
एमपी के इन इनिशिएटिवों पर अन्य राज्य भी काम करेंगे मध्यप्रदेश पहला राज्य है जिसने लाभार्थियों को योजना से जुड़ी जानकारी देने के लिए आयुष्मान चैटबॉट शुरू किया। यह व्यवस्था अब पूरे देश में लागू करने की रूपरेखा पर है। इसके अलावा मध्यप्रदेश आयुष्मान डिजिटल मिशन में भी अग्रणी राज्यों में शामिल है। यहां आयुष्मान आईडी बनाने से लेकर मरीजों के रिकॉर्ड डिजिटल रूप में अपलोड किए जा रहे हैं। क्वालिटी हेल्थ प्रोवाइडर सुनिश्चित करने की दिशा में प्रदेश ने बड़े शहरों में केवल NABH से मान्यता प्राप्त अस्पतालों को ही पैनल में शामिल करने का निर्णय लिया है।
एमपी की 7 साल की प्रमुख उपलब्धियां
• 4.30 करोड़ लाभार्थियों को योजना से जोड़ा गया।
• 50 लाख रुपए का फ्री क्लेम पास किया गया।
• 8,000 करोड़ रुपए के बिल पास किए गए।
क्वालिटी सुनिश्चित करने के कदम योगेश भरसट ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 650 NABH-प्रमाणित अस्पताल हैं, जिनमें से करीब 200 सिर्फ भोपाल में स्थित हैं। प्रदेश का प्रयास है कि बड़े शहरों में केवल NABH-प्रमाणित अस्पतालों को ही योजना से जोड़ा जाए ताकि उपचार की गुणवत्ता और पारदर्शिता बनी रहे। इस नीति पर अस्पतालों की कुछ आपत्तियों पर आगे चर्चा की जाएगी और एग्जीक्यूटिव कमेटी में अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

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रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और ‘डिजिटल फर्जीवाड़े’ का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी ‘अंधेरगर्दी’: लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: “राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल” पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस ‘डिजिटल सेंधमारी’ को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240