छिंदवाड़ा
अगर मन में पढ़ने की लगन हो, तो रास्ते खुद-ब-खुद बन जाते हैं। लाल जोड़े में सजी, हाथों में मेंहदी, माथे पर सिंदूर और गले में मंगलसूत्र आमतौर पर इस रूप में दुल्हन विदा होकर ससुराल जाती है, लेकिन सौंसर में नवविवाहिता ने ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी चर्चा हर कोई कर रहा है। नवविवाहिता वसुधा ने विवाह के सात फेरे लिये, घड़ी देखी और सीधा परीक्षा केंद्र पहुंच गई।
रविवार को विवाह और सोमवार को बीएड की परीक्षा
दुल्हन ने अपने सुनहरे कल के सपने को उत्तर पुस्तिका के लाईनों में अंकित कर दिया। ये अनोखी मिसाल पेश की है, दुल्हन बनी वसुधा ने, वसुधा का रविवार को विवाह हुआ और सोमवार को अपने जीवन साथी ऋषभ पालीवाल के साथ शासकीय महाविद्यालय सौंसर पहुंची और बीएड की परीक्षा दी। वसुधा एक निजी शिक्षण संस्था संचालक प्रशांत वाडेकर एवं हिना वाडेकर की पुत्री हैं । जिसका विवाह ऋषभ पालीवाल के साथ हुआ है।
अन्य परीक्षार्थियों की नजरें ठहर गई
परीक्षा केंद्र में जब अन्य परीक्षार्थी सजी संवरी दुल्हन को उत्तर पुस्तिका भरते हुए देख रहे थे तो सभी की नजरें ठहर गई, लेकिन वसुधा की कलम नहीं रूकी। उसके चेहरे पर एक अनोखा आत्मविश्वास था जो बता रहा था कि, यह दुल्हन सिर्फ घर ही नहीं भविष्य भी संवारने आई है।
'शिक्षा किसी रस्म के आगे नहीं झुकती', दुल्हन ने कहा
वसुधा ने बताया कि विवाह एक पड़ाव हो सकता है, लेकिन पढ़ाई एक यात्रा है। शिक्षा किसी रस्म के आगे नहीं झुकती। एक शिक्षित महिला ही परिवार और समाज को आगे बढ़ाती है । शिक्षा के प्रति ऐसा समर्पण कम ही देखने को मिलता है।

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